aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aurat"
ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनोंआप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए
माना जीवन में औरत इक बार मोहब्बत करती हैलेकिन मुझ को ये तो बता दे क्या तू औरत ज़ात नहीं
एक ही औरत को दुनिया मान करइतना घूमा हूँ कि चक्कर आ गए
अगर बज़्म-ए-हस्ती में औरत न होतीख़यालों की रंगीन जन्नत न होती
आबरू के लिए रोती है बहुत पिछले पहरएक औरत कि जो पेशा भी नहीं छोड़ती है
ज़माने अब तिरे मद्द-ए-मुक़ाबिलकोई कमज़ोर सी औरत नहीं है
औरत के ख़ुदा दो हैं हक़ीक़ी ओ मजाज़ीपर उस के लिए कोई भी अच्छा नहीं होता
औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँइक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सब से लड़ी हूँ
अभी रौशन हुआ जाता है रस्तावो देखो एक औरत आ रही है
औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौनाउस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है
सियासत के चेहरे पे रौनक़ नहींये औरत हमेशा की बीमार है
कौन बदन से आगे देखे 'औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में
पतझड़ के पीले पीले सोने से लदीपक्के बालों वाली औरत आएगी
मैं कि औरत हूँ मिरी शर्म है मेरा ज़ेवरबस तख़ल्लुस इसी बाइ'स तो 'हया' रक्खा है
अपना तो जो कुछ भी था घर में पड़ा था सभीथोड़ा बहुत छोड़ना चोर की आदत न थी
जिस की आँखों में शरारत थी वो महबूबा थीये जो मजबूर सी औरत है ये घर वाली है
दिन तो निकला ख़रीदा हुआ आदमीऐ ख़ुदा रात भी सब की औरत न हो
अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती हैदूसरी 'औरत पहली जैसी कब होती है
इश्क़ इंसान में औरत को जगा देता हैलोग हो जाते हैं शादाब समझ लो लड़की
तअक़्क़ुल मर्द में होता है और जज़्बात औरत मेंमिरे जैसा कोई रुकता तिरे जैसी कोई बढ़ती
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