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ग़ज़ल
लिया था इस ज़मीं में इम्तिहान-ए-तब्अ यारों से
किए मौज़ूँ ये हम ने ऐ 'नसीम' अशआर चुटकी में
नसीम भरतपूरी
ग़ज़ल
इक इम्तिहान-ए-वफ़ा है ये उम्र भर का अज़ाब
खड़ा न रहता अगर ज़लज़लों में क्या करता
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
ता-ब-कय शौकत-ए-अज्दाद पे ये नाज़-ओ-ग़ुरूर
ख़्वाब-ए-ग़फ़लत से उठो वक़्त के तेवर देखो
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
चलते हैं कू-ए-यार में है वक़्त-ए-इम्तिहाँ
हिम्मत न हारना दिल-ए-बीमार देखना
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
क्यूँ न ज़ोर-ए-तब्अ सब अहबाब दिखलाएँ 'हबीब'
इम्तिहान-ए-हुस्न नज़्म-ए-यक-दिगर शीशे में है
हबीब मूसवी
ग़ज़ल
जौर-ए-गर्दूं से जो मरने की भी फ़ुर्सत मिल जाए
इम्तिहान-ए-दम-ए-जाँ-परवर-ए-ईसी कर लूँ
शिबली नोमानी
ग़ज़ल
औज-ए-निहाद-ए-तबा की मिट के भी शान रह गई
मर के मैं सू-ए-आसमाँ मिल के उड़ा ग़ुबार में