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ग़ज़ल
झपकना जिस ने देखा हो तिरी पलकों का वो जाने
वगर्ना कौन माने गर कहूँ ख़ंजर बरसते हैं
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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झपकना जिस ने देखा हो तिरी पलकों का वो जाने
वगर्ना कौन माने गर कहूँ ख़ंजर बरसते हैं