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ग़ज़ल
वहदत-ए-हुस्न के जल्वों की ये कसरत ऐ इश्क़
दिल के हर ज़र्रे में आलम है परी-ख़ाने का
फ़ानी बदायुनी
ग़ज़ल
फ़ुर्क़त में वसलत बरपा है अल्लाह-हू के बाड़े में
आशोब-ए-वहदत बरपा है अल्लाह-हू के बाड़े में
जौन एलिया
ग़ज़ल
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
हुस्न-ए-जाँ-सोज़ ने वहदत में मुझे याद किया
मैं ये समझा कि मुझे इश्क़ ने बर्बाद किया
साक़िब लखनवी
ग़ज़ल
निगाह-ए-चश्म-ए-हासिद वाम ले ऐ ज़ौक़-ए-ख़ुद-बीनी
तमाशाई हूँ वहदत-ख़ाना-ए-आईना-ए-दिल का
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
नक़्श-ए-वहदत ही सुवैदा को कहा करते हैं
दिल में इक तिल है और उस तिल में ख़ुदा बैठा है
मुज़्तर ख़ैराबादी
ग़ज़ल
बज़्म-ए-कसरत में ये क्यूँ होता है उन का इंतिज़ार
पर्दा-ए-वहदत से वो बाहर निकल आएँगे क्या
क़मर जलालवी
ग़ज़ल
वहदत ओ कसरत के जल्वे ख़िल्क़त-ए-इंसाँ में देख
एक ज़र्रा इस क़दर फैला कि दुनिया हो गया
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
वहदत-ए-इंसाँ अपने को शाइ'र से मनवा लेती है
क्या अनजाने क्या बेगाने सब जाने-पहचाने हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
शरीक-ए-कसरत-ए-मख़्लूक़ तू क्यूँ हो गया यारब
तिरी वहदत का पर्दा क्या हुआ मैदान-ए-महशर में