आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",QEy"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",qey"
नज़्म
जब आई होली रंग-भरी सौ नाज़-ओ-अदा से मटक मटक
और घूँघट के पट खोल दिए वो रूप दिखला चमक चमक
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
हर्फ़ मासूम थे महकूम थे महसूर भी थे
लफ़्ज़ मस्लूब हुए होंटों पे आ के तेरे
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
नज़्म
किवाड़ों में की-होल से आँख इफ़रीत की झाँक कर देखती है
क़रीं वेंटीलेटर के चमगादड़ें झूलती हैं
शाहिद जमील
नज़्म
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साए हैं
तआ'रुफ़ रोग हो जाए तो उस का भूलना बेहतर