आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",gLH"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",glH"
नज़्म
उस शाम मुझे मालूम हुआ इस कार-गह-ए-ज़र्दारी में
दो भोली-भाली रूहों की पहचान भी बेची जाती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
इस कार-गह-ए-हस्ती में जहाँ
ये साग़र शीशे ढलते हैं
हर शय का बदल मिल सकता है
सब दामन पुर हो सकते हैं