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नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
सरवरी ज़ेबा फ़क़त उस ज़ात-ए-बे-हम्ता को है
हुक्मराँ है इक वही बाक़ी बुतान-ए-आज़री
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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सरवरी ज़ेबा फ़क़त उस ज़ात-ए-बे-हम्ता को है
हुक्मराँ है इक वही बाक़ी बुतान-ए-आज़री