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नज़्म
इस बख़्शिश के इस अज़्मत के हैं बाबा नानक शाह गुरु
सब सीस नवा अरदास करो और हर दम बोलो वाह गुरु
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
राजा की ये बात सुनी तो कहने लगा हम-साया
जिए वो सास कि चूहिया को भी जिस ने भैंस बनाया
क़तील शिफ़ाई
नज़्म
यहाँ तो नारसी-सस भी कहीं भी ख़ुद-गिरफ़्ता रह नहीं सकता
समुंदर छेड़ता है साहिराना सिम्फ़नी जिस में