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नज़्म
कि जब चौदह बरस के वास्ते श्री-राम को बन-वास जाना था
आमादा थे लखन भी भाई की सेवा में जाने को
त्रिपुरारि
नज़्म
वीर-सिंह और अमृता-प्रीतम यहाँ माहिर यहाँ
'अर्श' 'अख़्तर' 'जोश' और 'महरूम' से शाइ'र यहाँ