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नज़्म
तेरे जबीं से नूर-ए-हुस्न-ए-अज़ल अयाँ है
अल्लाह-रे ज़ेब-ओ-ज़ीनत क्या औज-ए-इज़्ज़-ओ-शाँ है
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
वो बालक है आज भी हैराँ मेला जूँ-का-तूँ है लगा
हैराँ है बाज़ार में चुप-चुप क्या क्या बिकता है सौदा
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
ज़ोफ़ से आँखों के नीचे तितलियाँ फिरती हुई
औज-ए-ख़ुद्दारी से दिल पर बिजलियाँ गिरती हुई
जोश मलीहाबादी
नज़्म
क्यूँ टिमटिमाए किर्मक-ए-शब-ताब की तरह
बन सकता है तू औज-ए-फ़लक पर अगर शहाब
सय्यद वहीदुद्दीन सलीम
नज़्म
तिरी जागीर में इरफ़ाँ की मस्ती है गुरु-नानक
तिरी तहरीर औज-ए-हक़-परस्ती है गुरु-नानक
तिलोकचंद महरूम
नज़्म
रहे शान-ए-तलाक़त लफ़्ज़-ओ-मा'नी हैं कि गुल-बूटे
ज़हे औज-ए-हज़ाक़त जान दे दी मुर्दा हिकमत को
अलम मुज़फ़्फ़र नगरी
नज़्म
उफ़्तादगी में भी तो हम-औज-ए-आसमाँ है
''ऐ ख़ाक-ए-हिंद तेरी अज़्मत में क्या गुमाँ है''
तिलोकचंद महरूम
नज़्म
औज-ए-हिम्मत पे रहा तेरी वफ़ा का ख़ुर्शेद
मौत के ख़ौफ़ पे ग़ालिब रही ख़िदमत की उमेद
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
बिठाया चाँद के माथे पे तुझ को दस्त-ए-क़ुदरत ने
ज़मीन-ए-शेर ने पाया था औज-ए-आसमाँ तुझ से
मयकश अकबराबादी
नज़्म
औज-ए-अफ़्लाक पे है माँग की अफ़्शाँ की दमक
शीशा-ए-मह से छलक कर मय-ए-तुंद-ओ-बे-दर्द
मुख़्तार सिद्दीक़ी
नज़्म
तेरी जबीं से नूर-ए-हुस्न-ए-अज़ल 'अयाँ है
अल्लह रे ज़ेब-ओ-ज़ीनत क्या औज-ए-‘इज़्ज़-ओ-शाँ है