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नज़्म
दिल बन चुका है मस्कन-ए-सोज़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़
सीना जवाब-ए-बर्क़-ए-तपाँ है तिरे बग़ैर
शैदा अम्बालवी
नज़्म
मिरी जाँ से फुसून-ए-सोज़-ओ-ग़म छिन क्यों नहीं जाता
न जाने मेरे दिल की ख़ुद-फ़रेबी क्यों नहीं जाती
सिद्दीक़ कलीम
नज़्म
वो सोज़-ओ-साज़-ए-मोहब्बत वो पुर-फ़ुसूँ रातें
वो हल्का हल्का तरन्नुम वो जाँ-फ़ज़ा बातें
सिद्दीक़ कलीम
नज़्म
है मिज़ाज उस वक़्त कुछ बिगड़ा हुआ सय्याद का
ऐ असीरान-ए-क़फ़स मौक़ा नहीं फ़रियाद का
राज्य बहादुर सकसेना औज
नज़्म
अफ़सोस मुल्क-भर में हो इक चराग़ वो भी
बुझ जाए जलते जलते सोज़-ए-ग़म-ए-निहाँ से
ज़ाहिदा ख़ातून शरवानिया
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ख़ुश्क और ख़स्ता सी ख़ाकिस्तर अफ़्सुर्दा में
सोज़-ए-ग़म को शरर-अँगेज़ करो
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
नज़्म
मता-ए-सोज़-ओ-साज़-ए-ज़िंदगी पैमाना ओ बरबत
मैं ख़ुद को इन खिलौनों से भी अब बहला नहीं सकता
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
इक हुदी-ख़्वान-ए-मोहब्बत इक नक़ीब-ए-इत्तिहाद
इक फ़िदा-ए-सोज़-ए-नाक़ूस-ओ-अज़ाँ पैदा हुआ