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नज़्म
ख़ुशी भी चौंक चौक उठी ग़म की आँख खुल गई
अगरचे डॉक्टर ने मुझ को मौत से बचा लिया
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
चौक चौक पर गली गली में सुर्ख़ फरेरे लहराते हैं
मज़लूमों के बाग़ी लश्कर सैल-सिफ़त उमडे आते हैं