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नज़्म
मोहम्मद यूसुफ़ पापा
नज़्म
मोहम्मद अनवर ख़ालिद
नज़्म
जौन एलिया
नज़्म
मता-ए-दिल मता-ए-जाँ तो फिर तुम कम ही याद आओ
बहुत कुछ बह गया है सैल-ए-माह-ओ-साल में अब तक
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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मता-ए-दिल मता-ए-जाँ तो फिर तुम कम ही याद आओ
बहुत कुछ बह गया है सैल-ए-माह-ओ-साल में अब तक