आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "maro.d"
नज़्म के संबंधित परिणाम "maro.d"
नज़्म
कि जिस को सुनते ही हुकूमतों के रंग-ए-रुख़ उड़ें
चपेटें जिन की सरकशों की गर्दनें मरोड़ दें
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
एक आदमी पुराने कैलन्डर पर निशान लगा रहा था
दूसरा नया कैलन्डर हाथ में मरोड़ रहा था
सारा शगुफ़्ता
नज़्म
वो चश्म-ए-पाक हैं क्यूँ ज़ीनत-ए-बर-गुस्तवाँ देखे
नज़र आती है जिस को मर्द-ए-ग़ाज़ी की जिगर-ताबी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
न हो नौमीद नौमीदी ज़वाल-ए-इल्म-ओ-इरफ़ाँ है
उमीद-ए-मर्द-ए-मोमिन है ख़ुदा के राज़-दानों में
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
किस की नौ-मीदी पे हुज्जत है ये फ़रमान-ए-जदीद
है जिहाद इस दौर में मर्द-ए-मुसलमाँ पर हराम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तिरे माथे का टीका मर्द की क़िस्मत का तारा है
अगर तू साज़-ए-बेदारी उठा लेती तो अच्छा था