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नज़्म
रूह क्या होती है इस से उन्हें मतलब ही नहीं
वो तो बस तन के तक़ाज़ों का कहा मानते हैं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
वो इक ऐसी आग है जिस को सिर्फ़ दहकने से मतलब है
वो इक ऐसा फूल है जिस पर अपनी ख़ुशबू बोझ बनी है
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
और हम उस की हैरानी पर शर्मिंदा हो कर रह जाते
कुछ और हमारा मतलब था फिर देर तलक ये समझाते
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
अर्ज़-ए-मतलब से झिजक जाना नहीं ज़ेबा तुझे
नेक है निय्यत अगर तेरी तो क्या पर्वा तुझे