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नज़्म
बदल जाएगा मेयार-ए-शराफ़त चश्म-ए-दुनिया में
ज़ियादा थे जो अपने ज़ोम में वो सब से कम होंगे
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
जहाँ में जितने हैं फ़नकार उतनी तरह के हुस्न
तो क्या बंधे टिके मेयार-ए-नौ का इम्काँ है