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नज़्म
ब-ज़िद हैं फिर भी कज-नज़र हयात शाद-काम है
नुमाइश-ओ-नुमूद-ओ-नंग-ओ-नाम पर निगाह है!
मोहसिन भोपाली
नज़्म
सरीर काबिरी
नज़्म
गुमाँ होता है की लश्कर-कुशी बाद-ए-बहारी ने
ज़िरह-पोश आब हो जाता है जब बादल गुज़रते हैं
नज़्म तबातबाई
नज़्म
आँखों में हुस्न-ए-मस्ती इक कैफ़-ए-ख़ुद-नुमाई
क़दमों में शान-ए-लग़्ज़िश गोया कोई शराबी
वफ़ा बराही
नज़्म
हो मय-ए-शौक़ से जब आप ही क़ुदरत सरशार
है तुम्हारे लिए दुनिया की नुमाइश बे-कार