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नज़्म
वहीद अख़्तर
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कोई है इस नियस्ताँ को जो फिर गुलशन बना डाले
कोई है जो ख़स-ओ-ख़ाशाक को यकसर जला डाले
सय्यद मेहदी हुसैन रिज़वी
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मीर अंजुम परवेज़
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सलमान सरवत
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लहर खाता है रग-ए-ख़ाशाक में जिस का लहू
जिस के दिल की आँच बन जाती है सैल-ए-रंग-ओ-बू
जोश मलीहाबादी
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ओवेस अहमद दौराँ
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सोहन राही
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आनंद नारायण मुल्ला
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अज़ीज़ तमन्नाई
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था ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-देहली ग़ैरत-ए-सद-लाला-ज़ार
रश्क-ए-सद-गुलज़ार था एक एक ख़ार-ए-लखनऊ