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नज़्म
बुलबुल गुल की याद में रो-रो गाए दीपक राग
मस्त पपीहा दूर से नग़्मों की भड़काए आग
राजा मेहदी अली ख़ाँ
नज़्म
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साए हैं
तआ'रुफ़ रोग हो जाए तो उस का भूलना बेहतर