aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "saaya-e-baal-e-humaa-e-ra.nj"
उसी के साया में पाता है परवरिश इक़बालमिसाल-ए-साया-ए-बाल-ए-हुमा सुदेशी है
न तो क़दमों के तले फ़र्श-ए-गुहर माँगा हैऔर न सर पर कुलह-ए-बाल-ए-हुमा माँगी है
जवानी क्या है तुम से क्या कहें हमजवानी का है अब पीरी में मातमजवानी शो'ला-ए-आतिश-फ़िशाँ हैजवानी ज़ीस्त का राज़-ए-निहाँ हैजवानी है जवाब-ए-ख़ंदा-ए-गुलजवानी एहतिमाम-ए-साग़र-ओ-मुलजवानी इज़्तिराब-ए-ज़िंदगी हैजवानी पेच-ओ-ताब-ए-ज़िंदगी हैजवानी ज़िंदगी का इक तबस्सुमजवानी ज़िंदगी का इक तरन्नुमजवानी मतला’-ए-नूर-ए-सहर हैजवानी रश्क-ए-ख़ुर्शीद-ओ-क़मर हैजवानी ज़िंदगी का ख़ून-ए-ताज़ाजवानी चेहर-ए-इंसाँ का ग़ाज़ाजवानी क्या शराब-ए-ज़िंदगी हैजवानी इल्तिहाब-ए-ज़िंदगी हैजवानी गर्मी-ए-बाज़ार-ए-'आलमजवानी गेसू-ए-ख़मदार-ए-'आलमजवानी ख़ामुशी की गुफ़्तुगू हैजवानी ख़ूबसूरत ख़ूब-रू हैजवानी है बहार-ए-ज़िंदगानीजवानी लाला-ज़ार-ए-ज़िंदगानीजवानी में 'अजब इक दिलकशी हैजवानी में 'अजब इक मह-वशी हैजवानी ज़िंदगी का नक़्श-ए-अव्वलजवानी एक शोरिश एक हलचलजवानी साया-ए-बाल-ए-हुमा हैजवानी में जहाँ भी ज़ेर-ए-पा हैजवानी जैसे पानी की रवानीजवानी में हर इक ग़म पानी पानीजवानी में निहाँ इक बाँकपन हैजवानी ज़िंदगानी की दुल्हन हैजवानी इब्तिदा-ए-ज़ौक़-ए-परवाज़जवानी इंतिहा-ए-शौक़-ए-परवाज़जवानी एक हर्फ़-ए-दिल-नशीं हैजवानी ज़ीस्त का ताज-ओ-नगीं हैजवानी ज़िंदगानी का है दम-ख़मजवानी ताक़त-ए-सोहराब-ओ-रुस्तमजवानी आसमान-ए-ज़िंदगी हैजवानी ही निशान-ए-ज़िंदगी हैजवानी कोहकन का ज़ोर-ए-बाज़ूजवानी एक अफ़्सूँ एक जादूजवानी जोशिश-ए-किरदार-ए-पैहमजवानी गर्मी-ए-रफ़्तार-ए-पैहमजवानी मख़्ज़न-ए-हर्फ़-ओ-हिकायातजवानी मरकज़-ए-कश्फ़-ओ-करामातजवानी चश्मा-ए-तसनीम-ओ-कौसरजवानी आब-ए-रहमत का समुंदरजवानी लग़्ज़िश-ए-मस्ताना-ए-'इश्क़जवानी बाज़ी-ए-तिफ़्लाना-ए-'इश्क़जवानी दास्तान-ए-'क़ैस-ओ-लैला'जवानी क़िस्सा-ए-यूसुफ़-ज़ुलेख़ाजवानी क्या है बर्क़-ए-तूर गोयाजवानी क्या जमाल-ए-हूर गोयाजवानी सोज़िश-ए-रोज़-ए-क़यामतजवानी एक हिद्दत इक हरारतजवानी ख़ुद-सिताई ख़ुद-नुमाईजवानी जंग-जूई कज-अदाईजवानी ज़िंदगी का ज़मज़मा हैजवानी ज़िंदगी का तनतना हैमगर अब ज़िंदगी को साथ ले करजवानी जा चुकी पीरी को दे करजवानी को न पूछो अब कहाँ हैजवानी शम'-ए-कुश्ता का धुआँ है
ऐ बाद-ए-सबामहबूब से मिलने जाना हैपैग़ाम मिरा पहुँचाना हैपर हद्द-ए-अदब लाज़िम रखनावो शोख़ जवाँ गर ख़्वाब में होधीरे से ज़ुल्फ़ें सहलानाबेदार अगर वो हो जाएतो कहना सलाम-ए-शौक़ मिराफिर कहना कि दीवानी मैंपलकों को बिछाए बैठी हूँमिलने को बहुत बेताब हूँ मैंऔर नींद अगर कुछ गहरी होपलकों को हौले से छूनारुख़्सार थपक देना उन केदीवार-ओ-दर पर लिख देनाऐ जान-ए-ग़ज़ल मैं ज़िंदा हूँबस आप की दीद की ख़ातिर अब
आ बाद-ए-सबा आ कि नया साल मुबारकला जल्द ख़बर ला कि नया साल मुबारक
सरगुज़श्त-ए-नौहागर है ज़िंदगीदास्तान-ए-अश्क-ए-तर है ज़िंदगीक्या उड़ेगी वादी-ए-उम्मीद मेंताइर-ए-बे-बाल-ओ-पर है ज़िंदगीआँख झपकी हो गया क़िस्सा तमामआह कितनी मुख़्तसर है ज़िंदगीपी के बहके क्यों न एहसास-ए-वजूदसाग़र-ए-जादू-असर है ज़िंदगीइब्तिदा-ए-ज़िंदगानी है अजलइंतिहा-ए-दर्द-ए-सर है ज़िंदगीज़िंदगी है रंज-ओ-ग़म की दास्ताँदर्द-ए-दिल सोज़-ए-जिगर है ज़िंदगीज़ेब-ए-गुलशन मुनहसिर है ख़ार परदर्द-ए-दिल पर मुनहसिर है ज़िंदगीजी रहा है तू भी ऐ 'मंज़र' मगरएक ही अंदाज़ पर है ज़िंदगी
तू आए तो गुलशन का हसीं चेहरा निखर जाएहर ग़ुंचा महक जाए हर एक पत्ता सँवर जाएकुम्हलाए से फूलों का भी कुछ हाल सुधर जाएबाक़ी रहे क़िस्मत में कोई ख़म न कोई बलऐ बाद-ए-सबा बाद-ए-सबा बाद-ए-सबा चल
गुलशन-ए-याद में गर आज दम-ए-बाद-ए-सबाफिर से चाहे कि गुल-अफ़शाँ हो तो हो जाने दोउम्र-ए-रफ़्ता के किसी ताक़ पे बिसरा हुआ दर्दफिर से चाहे कि फ़रोज़ाँ हो तो हो जाने दोजैसे बेगाने से अब मिलते हो वैसे ही सहीआओ दो चार घड़ी मेरे मुक़ाबिल बैठोगरचे मिल-बैठेंगे हम तुम तो मुलाक़ात के बा'दअपना एहसास-ए-ज़ियाँ और ज़ियादा होगाहम-सुख़न होंगे जो हम दोनों तो हर बात के बीचअन-कही बात का मौहूम सा पर्दा होगाकोई इक़रार न मैं याद दिलाऊँगा न तुमकोई मज़मून वफ़ा का न जफ़ा का होगागर्द-ए-अय्याम की तहरीर को धोने के लिएतुम से गोया हों दम-ए-दीद जो मेरी पलकेंतुम जो चाहो तो सुनो और जो न चाहो न सुनोऔर जो हर्फ़ करें मुझ से गुरेज़ाँ आँखेंतुम जो चाहो तो कहो और जो न चाहो न कहो
वो चमन में जिस ने कली कली को मिज़ाज-ए-बाद-ए-सबा दियावो हर एक ग़ुंचे के लब को जिस ने है इक शु'ऊर-ए-नवा दियावो हर एक हाल में बस्ता-लब न किसी से शिकवा न कुछ तलबग़म-ए-'आशिक़ी तिरी ख़ैर हो तुझे यादगार बना दियावो शरीक-ए-बज़्म-ए-समन-बरां वो सहीम-ए-कुल्फ़त-ए-बे-कसाँदिल-ए-रेज़ा-रेज़ा को जिस ने अपने रविश रविश पे लुटा दियारहा कज जबीं पे सर-ए-कफ़न वही हौसला वही बाँकपनपस-ए-मर्ग मैला नहीं कफ़न ये अजल को साफ़ बता दियाजिसे क़ैद-ओ-बंद के मरहले न रह-ए-वफ़ा से हटा सकेब-हमा शक़ावत-ए-दुश्मनाँ भी पयाम-ए-सिद्क़-ओ-सफ़ा दियावो जो चारा-साज़-ए-जहाँ रहा जो शरीक-ए-दर्द-ए-निहाँ रहाजो वतन की रूह-ए-रवाँ रहा उसे हम ने कितना भुला दियावो शहीद-ए-शेवा-ए-दिलबरी वो क़तील-ए-नावक-ए-दोस्तीवो ख़तीब-ए-मिम्बर-ए-आश्ती उसे अपनी क़ौम ने क्या दिया
रहेगा रंज ज़माने में यादगार तिरावह कौन दिल है कि जिस में नहीं मज़ार तिराजो कल रक़ीब था है आज सोगवार तिराख़ुदा के सामने है मुल्क शर्मसार तिरापली है क़ौम तिरे साया-ए-करम के तलेहमें नसीब थी जन्नत तिरे क़दम के तले
हम कहीं साअत-ए-बे-बाल-ओ-परीखोल के दम लेते हैंरेग-ज़ारों से निकलते हैंरवानी ले करऔर उतर जाते हैंगदराए हुए पानी मेंबस इसी पानी में हैअपनी हवसअपने चलन का क़िस्साये चलनख़्वाब-गह-हस्त से होता हुआकाशाने तलक जाता हैजिस की दर्ज़ों से दुआ झाँकती हैऔर ख़िल्क़त हैकि ग़फ़लत-भरे पहरों में हवा माँगती है
बदलेगा रंग शाम-ए-अलममेरे बाद आहोगा ज़रा सा दर्द भी कममेरे बाद आतन्हाइयाँ भी अपनी हैंअपनी हैं साअतेंख़ुद-साख़्ता हैं सारे ये ग़ममेरे बाद आख़्वाबों के इस मुंडेर से देखा किए मुझेये और बात है कि हुई चश्म मेरी नमनमनाकियों की बात ख़त्ममेरे बाद आहरियालियों की भीड़मगर दुख की काश्त हैबदलेगा रंग चर्ख़-ए-कुहनमेरे बाद आ
हाँ मगर था रिक्शा वाला एक सरगर्म-ए-सफ़रजिस को ग़ुर्बत कर रही थी मौत से सीना-सिपरजो निगाह-ए-अहल-ए-सर्वत में हक़ीर-ओ-पाएमालज़िंदगानी वक़्फ़ थी जिस की बराए अहल-ए-ज़रजिस की दुनिया फ़क्र-ओ-फ़ाक़ा जिस की क़िस्मत रंज-ओ-ग़मजब्र-ए-क़ुदरत ही ने जिस को कर दिया बे-बाल-ओ-परख़ून बन बन कर पसीना हर बुन-ए-मू से रवाँचार पैसे के लिए जो बन गया था जानवरबे-नियाज़-ए-'ऐश-ओ-'इशरत आश्ना-ए-दर्द-ओ-ग़मएक मुश्त-ए-उस्तुख़्वाँ आशुफ़्ता-रौ बा-चश्म-ए-तरउस घड़ी भी मुज़्तरिब था रिज़्क़-कोशी के लिएआग में वो जल रहा था अपनी रोटी के लिए
चुप जो हुआ दरीचा तो गूँजी सदा-ए-बामअब कर सकोगे साए तले मेरे तुम क़ियाम
बे-दाग़ वुसअ'तों की आहू-ए-बेबाकतेरे एक ही मुश्क-बेज़ झोंके नेयादों के दरीचे खोल दिए हैंझुलसती दोपहरों मेंघने पीपल की छाँव मेंझूला झूलती हम-जोलियाँख़ुश-गुलू चाढ़े की आवाज़ मेंरेग-ज़ारों के गीतकुन रस हुए जाते हैंबरसात की आबनूसी रात का मंज़रखुले आसमान तले बान की ठंडी चारपाई परचादर तान करधुले तारों की झिलमिलाहटदीद-रस हुई जाती हैसावन रुत में गीली सोंधी मटकी महकारचढ़ी नहरों की सलोनी सावनी थी मुश्क-बारसुबहान तेरी क़ुदरत कीसदाएँ भी अजब थींडाल डाल को कई कोयल कीअदाएँ भी ग़ज़ब थींमैं चश्म-ए-तसव्वुर सेउन चुँधिया देने वाले रौशनियों सेनज़रें बचा करइस बज़्म-ए-नशात में झाँक लेती हूँकिहर शय अपने असल को ढूँढती है
माया-ए-हिंदोस्ताँ था बाल-गंगा-धर-तिलकइस चमन का बाग़बाँ था बाल-गंगा-धर-तिलकख़ुशकलाम-ओ-ख़ुश-बयाँ था बाल-गंगा-धर-तिलकमेहरबाँ था राज़दाँ था बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दपारसा था पारसा था बाल-गंगा-धर-तिलकबे-रिया था बे-रिया था बाल-गंगा-धर-तिलकरहनुमा था रह-नुमा था बाल-गंगा-धर-तिलकपेशवा था पेशवा था बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दमुल्क की रूह-ए-रवाँ था बाल-गंगा-धर-तिलकबा'इस-ए-आराम-जाँ था बाल-गंगा-धर-तिलकहर किसी का क़द्र-दाँ था बाल-गंगा-धर-तिलकइस ज़मीं पर आसमाँ था बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दइफ़्तिख़ार-ए-हिन्द था वो बाल-गंगा-धर-तिलकजाँ-निसार-ए-हिन्द था वो बाल-गंगा-धर-तिलकनौ-बहार-ए-हिन्द था वो बाल-गंगा-धर-तिलकपास-दार-ए-हिन्द था वो बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दमर्द-ए-मैदान-ए-सियासत बाल-गंगा-धर-तिलकबा-मुरव्वत बा-मोहब्बत बाल-गंगा-धर-तिलकसाहब-इक़बाल-ओ-शौकत बाल-गंगा-धर-तिलकपाक-सूरत पाक-सीरत बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दहर घड़ी सीना-सिपर था बाल-गंगा-धर-तिलककितना बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तर था बाल-गंगा-धर-तिलकदिल-जलों से बा-ख़बर था बाल-गंगा-धर-तिलकसब का मंज़ूर-ए-नज़र था बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दज़ीनत-ए-बाग़-ए-वतन था बाल-गंगा-धर-तिलकइक फला-फूला चमन था बाल-गंगा-धर-तिलकनोहा-ख़्वान-ओ-ना'रा-ज़न था बाल-गंगा-धर-तिलकवाक़िफ़-रंज-ओ-मेहन था बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दरहनुमाई कर गया वो बाल-गंगा-धर-तिलकसर पर एहसाँ धर गया वो बाल-गंगा-धर-तिलककब किसी से डर गया वो बाल-गंगा-धर-तिलकमरने वाला मर गया वो बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'दकाश फिर दुनिया में आए बाल-गंगा-धर-तिलकशक्ल फिर अपनी दिखाए बाल-गंगा-धर-तिलकऔर फिर गीता सुनाए बाल-गंगा-धर-तिलक'बिस्मिल' आ कर फिर न जाए बाल-गंगा-धर-तिलककौन भारत की ख़बर ले उस के मर जाने के बा'द
देखो वो जाती है रिश्वत से ख़रीदी हुई कारसेहन-ए-गुलशन में हो जैसे गुज़राँ मौज-ए-बहारपाक दामन पे नहीं उस के ज़रा गर्द-ओ-ग़ुबारचोर-बाज़ार में फिरती है ब-सद-इज़्ज़-ओ-वक़ारक्या हो इस कार के नीचे जो कोई आ जाएबे-वसीला हो तो लम्बी सी सज़ा पा जाए
घर की इज़्ज़त का भरम रखती रही वो औरतज़िंदगी जीती रही अपनी सँभाले हुरमतअपने बच्चों के लिए जीती रही थी अब तकज़हर हालात का ख़ुद पीती रही थी अब तकउम्र-भर ज़ुल्म-ओ-सितम हँसते हुए सहती रहीअपने ही आप से गुज़री जो उसे कहती रहीसिर्फ़ इक छत ही मिली प्यार का साया न मिलामुतमइन ज़ीस्त का ग़ुंचा न कभी दिल का खिलाबाल-बच्चे भी जवाँ हो के हुए बेगानेमाँ पे क्या बीत गई उस से रहे अनजाने
और यूँ कहीं भी रंज-ओ-बला से मफ़र नहींक्या होगा दो घड़ी में किसी को ख़बर नहींअक्सर रियाज़ करते हैं फूलों पे बाग़बाँहै दिन की धूप रात की शबनम उन्हें गिराँलेकिन जो रंग बाग़ बदलता है ना-गहाँवो गुल हज़ार पर्दों में जाते हैं राएगाँरखते हैं जो 'अज़ीज़ उन्हें अपनी जाँ की तरहमिलते हैं दस्त-ए-यास वो बर्ग-ए-ख़िज़ाँ की तरहलेकिन जो फूल खिलते हैं सहरा में बे-शुमारमौक़ूफ़ कुछ रियाज़ पे उन की नहीं बहारदेखो ये क़ुदरत-ए-चमन-आरा-ए-रोज़गारवो अब्र-ओ-बाद ओ बर्फ़ में रहते हैं बरक़रारहोता है उन पे फ़ज़्ल जो रब्ब-ए-करीम कामौज-ए-सुमूम बनती है झोंका नसीम काअपनी निगाह है करम-ए-कारसाज़ परसहरा चमन बनेगा वो है मेहरबाँ अगरजंगल हो या पहाड़ सफ़र हो कि हो हज़ररहता नहीं वो हाल से बंदे के बे-ख़बरउस का करम शरीक अगर है तो ग़म नहींदामान-ए-दश्त दामन-ए-मादर से कम नहीं
वो शख़्स जिस को हँसते हुए घर पसंद थेवो शख़्स जिस को बोलते मंज़र पसंद थेवो शख़्स जिस के साथ समय ख़ुश-गवार थावो शख़्स जाने कितने दिलों का क़रार थाकुछ वक़्त से वो हालत-ए-दुनिया से है ख़फ़ाख़ुशबू से रंज कोह से दरिया से है ख़फ़ाआँखें उदास ऐसी कि माथे पे बल पड़ेंअफ़्सुर्दगान-ए-शहर के आँसू निकल पड़ेंदुनिया में गुम नहीं है ग़म-ए-ज़ात में है गुमकैसे बताऊँ तुम को वो किस बात में है गुम
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