क़स्र-ए-दिल कुछ इस क़दर टूटा हुआ है एहतमाम
उन के बस इक लम्स भर से ख़ाक में मिल जाए गा
वाए आशिक़-ए-नादाँ काएनात ये तेरी
इक शिकस्ता शीशे को दिल बनाए बैठा है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
क़स्र-ए-दिल कुछ इस क़दर टूटा हुआ है एहतमाम
उन के बस इक लम्स भर से ख़ाक में मिल जाए गा
वाए आशिक़-ए-नादाँ काएनात ये तेरी
इक शिकस्ता शीशे को दिल बनाए बैठा है