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विश्वास पर कहानियाँ

आम

सआदत हसन मंटो

यह एक बूढ़े मुंशी की कहानी है जो पेंशन के बूते अपने परिवार को पाल रहा है। अपने अच्छे अख़्लाक़ के चलते उसकी अमीर लोगों से जान-पहचान है। लेकिन इन अमीरों में दो लोग ऐसे हैं जो उसे बहुत अज़ीज़ होते हैं। इनके लिए वह हर साल आम के मौसम में अपने परिवार वालों की इच्छाओं का गला घोंट कर आम के टोकरे भिजवाता है। मगर इस बार की गर्मी इतनी भयानक थी कि वह बर्दाश्त नहीं कर सका और मर गया। उसके मरने की इत्तिला जब उन दोनों अमीरज़ादों को दी गई तो दोनों ने ज़रूरी काम का बहाना कर के आने से इंकार कर दिया।

साहिब-ए-करामात

सआदत हसन मंटो

साहिब-ए-करामात सीधे सादे व्यक्तियों को मज़हब का लिबादा ओढ़ कर धोखा देने और मूर्ख बनाने की कहानी है। एक चालाक आदमी पीर बन कर मौजू का शोषण करता है। शराब के नशे में धुत्त उस पीर को करामाती बुज़ुर्ग समझ कर मौजू की बेटी और बीवी उसकी हवस का शिकार होती हैं। मौजू की अज्ञानता की हद यह है कि उस तथाकथित पीर की कृत्रिम दाढ़ी तकिया के नीचे मिलने के बाद भी उसकी चालबाज़ी को समझने के बजाय उसे चमत्कार समझता है।

दूदा पहलवान

सआदत हसन मंटो

एक नौकर की अपने मालिक के प्रति वफ़ादारी इस कहानी का विषय है। सलाहू ने अपने लकड़पन के समय से ही दूदे पहलवान को अपने साथ रख लिया था। बाप की मौत के बाद सलाहू खुल गया था और हीरा मंडी की तवायफ़ों के बीच अपनी ज़िंदगी गुज़ारने लगा था। एक तवायफ़ की बेटी पर वह ऐसा आशिक़ हुआ कि उसका दिवाला ही निकल गया। घर को कुर्क होने से बचाने के लिए उसे बीस हज़ार रूपयों की ज़रूरत थी, जो उसे कहीं से न मिले। आख़िर में दूदे पहलवान ने ही अपना आत्म-सम्मान बेचकर उसके लिए पैसों का इंतेज़ाम किया।

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गुलनार

मिसेज़ अब्दुल क़ादिर

कहानी लोगों के अंधविश्वास और उसे हक़ीक़त में पेश करने की दास्तान को बयान करती है। वे दोनों अपनी ज़िंदगी से काफ़ी ख़ुश थे। लेकिन औलाद न होने के कारण उदास भी थे। दिल बहलाने के लिए उसकी बीवी ने गुलनार नाम की बिल्ली पाल रखी थी, जिसे वह बहुत चाहती थी। औलाद के लिए वह दूसरी शादी कर लेता है। यह दूसरी शादी उसकी ज़िंदगी को एक ऐसा मोड़ देती है कि उसे ख़ुद उस पर यक़ीन नहीं आता।