वाए तिलिस्म-ए-नक़्श-ए-फ़रंग
भूल गया उर्दू भी मैं
दिवाना बज़्म में हर शख़्स हो गया उन का
न जाने कौन सा जादू नयन में रक्खा है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
वाए तिलिस्म-ए-नक़्श-ए-फ़रंग
भूल गया उर्दू भी मैं
दिवाना बज़्म में हर शख़्स हो गया उन का
न जाने कौन सा जादू नयन में रक्खा है