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हत्या पर उद्धरण

कोई ज़ी-अक़ल और साहिब-ए-होश-ओ-फ़हम इन्सान ख़ून बहाना पसंद नहीं करता सिवाए उनके जो अपने अज़हान की आग़ोश में भयानक जराइम-ओ-शदायद की परवरिश करते हैं।

सआदत हसन मंटो
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