कायनात का मुताला: तख़य्युल (कल्पना) की अस्ली ख़ुराक
तख़य्युल (कल्पना) को परवान चढ़ने के लिए कायनात और इंसानी फ़ितरत को गहराई से देखने और समझने की ज़रूरत होती है, वरना यह ताक़त कमज़ोर पड़ कर बे-असर हो जाती है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
तख़य्युल (कल्पना) को परवान चढ़ने के लिए कायनात और इंसानी फ़ितरत को गहराई से देखने और समझने की ज़रूरत होती है, वरना यह ताक़त कमज़ोर पड़ कर बे-असर हो जाती है।