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नज़ाकत पर ग़ज़लें

नज़ाकत महबूब की एक अहम

सिफ़त है। शाइरों ने महबूब की इस सिफ़त का बयान मुबालिग़ा आमेज़ अंदाज़ में किया है और अपने तख़य्युल की ज़रख़ेज़ी का सुबूत दिया है। नज़ाकत से महबूब के हुस्न का हद दर्जा इज़हार भी मक़सूद होता है, हमारा ये इन्तिख़ाब महबूब की नज़ाकत के हवाले से आपके तमाम तसव्वुरात को तोड़ देगा। आप उसे पढ़िए और महबूब की एक नई तस्वीर मुलाहज़ा कीजिए।

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