रौशनी शायरी

रौशनी और तारीकी शायरी में सिर्फ़ दो लफ़्ज़ नहीं हैं बल्कि इन दोनों लफ़्ज़ों का इस्तिआराती और अलामती बयान ज़िंदगी की बे-शुमार सूरतों पर मुहीत है। रौशनी को मौज़ू बनाने वाले हमारे इस इन्तिख़ाब को पढ़ कर आप हैरान रह जाएंगे कि एक लफ़्ज़ शायरी में जा कर किस तरह अपने मानी की सतह पर नई नई सूरतें इख़्तियार कर लेता है। शायरी में रौशनी ज़िंदगी की मुस्बत क़दरों की अलामत भी है और तारीकी की मासूमियत को ख़त्म करके नई बेचैनियों और परेशानियों को जन्म देने का ज़रिया भी।