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सामाजिक प्रथा पर कहानियाँ

आम

सआदत हसन मंटो

यह एक बूढ़े मुंशी की कहानी है जो पेंशन के बूते अपने परिवार को पाल रहा है। अपने अच्छे अख़्लाक़ के चलते उसकी अमीर लोगों से जान-पहचान है। लेकिन इन अमीरों में दो लोग ऐसे हैं जो उसे बहुत अज़ीज़ होते हैं। इनके लिए वह हर साल आम के मौसम में अपने परिवार वालों की इच्छाओं का गला घोंट कर आम के टोकरे भिजवाता है। मगर इस बार की गर्मी इतनी भयानक थी कि वह बर्दाश्त नहीं कर सका और मर गया। उसके मरने की इत्तिला जब उन दोनों अमीरज़ादों को दी गई तो दोनों ने ज़रूरी काम का बहाना कर के आने से इंकार कर दिया।

ऐक्ट्रेस की आँख

सआदत हसन मंटो

यह एक नीम मज़ाहिया कहानी है। देवी नाम की ऐक्ट्रेस जो ख़ूबसूरत तो नहीं है लेकिन पुर-कशिश बहुत है। एक बार वह आँख में गर्द पड़ जाने की वजह से नाटकीय ढंग से चीखती है। उसके हाय हाय से सेट पर मौजूद हर शख़्स उसकी आँखों से गर्द निकालने की भरसक कोशिश करता है लेकिन नाकाम रहता है। एक साहब बाहर से आते हैं और गर्द निकालने में कामयाब हो जाते हैं। ठीक होते ही ऐक्ट्रेस सभी को नज़रअंदाज़ कर के सेठ के पास चली जाती है और सब ललचाई नज़रों से देखते रह जाते हैं।

भंगन

सआदत हसन मंटो

एक ग़लत-फ़हमी के चलते मियाँ-बीवी के बीच हुई तकरार पर आधारित कहानी। वह जब रात को बीवी के पास जाता है तो बीवी नाराज़़गी में उसे अपने से दूर कर देती है। वह उसे मनाने की कोशिश करता है, पर वह लगातार उस से नाराज़़ रहती है। आख़िर में जब वह पूछती है कि उसने सुबह भंगन को बाँहों में क्यों लिया था तो वह बताता है कि वह गर्भवती थी और बेहोश हो कर गिरने वाली थी। उसने तो बस उसे गिरने से बचाने के लिए सँभाल लिया था। बीवी यह सुनकर ख़ुश हो जाती है।

पाँच दिन

सआदत हसन मंटो

बंगाल के अकाल की मारी हुई सकीना की ज़बानी एक बीमार प्रोफे़सर की कहानी बयान की गई है, जिसने अपने चरित्र को बुलंद करने के नाम पर अपनी फ़ित्री ख़्वाहिशों को दबाए रखा। सकीना भूख से बेचैन हो कर एक दिन जब उसके घर में चली आती है तो प्रोफे़सर कहता है कि तुम इसी घर में रह जाओ, मैं दस बरस तक स्कूल में लड़कियों को पढ़ाता रहा इसलिए उन्हीं बच्चियों की तरह तुम भी एक बच्ची हो। लेकिन मरने से पाँच दिन पहले वह स्वीकार करता है कि उसने हमेशा सकीना सहित उन सभी लड़कियों को जिन्हें उसने पढ़ाया है हमेशा ग़लत निगाहों से देखा है।

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चोरी

सआदत हसन मंटो

यह एक बूढ़े बाबा की कहानी है जो अलाव के गिर्द बैठे बच्चों को अपनी ज़िंदगी से जुड़ी एक कहानी सुनाता है। कहानी उस वक़्त की है जब उसे जासूसी नॉवेल पढ़ने का दीवानगी की हद तक शौक़़ था और इसी शौक़़ के चलते उसने किताबों की एक दुकान से अपनी पसंद की किताब चुरा ली थी। मगर इस चोरी ने उसकी ज़िंदगी को कुछ इस तरह बदला कि वह उम्र भर के लिए चोर बन गया।

क़ादिरा क़साई

सआदत हसन मंटो

अपने ज़माने की एक ख़ूबसूरत और मशहूर वेश्या की कहानी। उसके कोठे पर बहुत से लोग आया करते थे। सभी उससे मोहब्बत का इज़हार किया करते थे। उनमें एक ग़रीब शख़्स भी उससे मोहब्बत का दावा करता था। वेश्या ने उसकी मोहब्बत को ठुकरा दिया। वेश्या के यहाँ एक बेटी हुई। वह भी बहुत ख़ूबसूरत थी। जिन दिनों उसकी बेटी की नथ उतरने वाली थी उन्हीं दिनों देश का विभाजन हो गया। इसमें वेश्या मारी गई और उसकी बेटी पाकिस्तान चली गई। यहाँ भी उसने अपना कोठा जमाया। जल्द ही उसके कई चाहने वाले निकल आए। वह जिस शख़्स को अपना दिल दे बैठी थी वह एक क़ादिरा कसाई था, जिसे उसकी मोहब्बत की कोई ज़रूरत नहीं थी।

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हारता चला गया

सआदत हसन मंटो

एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसे जीतने से ज़्यादा हारने में मज़ा आता है। बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद फ़िल्मी दुनिया में उसने बे-हिसाब दौलत कमाई थी। यहाँ उसने इतनी दौलत कमाई कि वह जितना ख़र्च करता उससे ज़्यादा कमा लेता। एक रोज़ वह जुआ खेलने जा रहा था कि उसे इमारत के नीचे ग्राहकों को इंतज़ार करती एक वेश्या मिली। उसने उसे दस रूपये रोज़ देने का वादा किया, ताकि वह अपना धंधा बंद कर सके। कुछ दिनों बाद उसने देखा कि वह वेश्या फिर खिड़की पर बैठी ग्राहक का इंतेज़ार कर रही। पूछने पर उसने ऐसा जवाब दिया कि वे व्यक्ति ला-जवाब हो कर ख़ामोश हो गया।

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ये परी चेहरा लोग

ग़ुलाम अब्बास

हर इंसान अपने स्वभाव और चरित्र से जाना जाता है। सख़्त मिज़ाज बेगम बिल्क़ीस तुराब अली एक दिन माली से बाग़ीचे की सफ़ाई करवा रही थी कि वह मेहतरानी और उसकी बेटी की बातचीत सुन लेती है। बातचीत में माँ-बेटी बेगमों के असल नाम न लेकर उन्हें तरह-तरह के नामों से बुलाती हैं। यह सुनकर बिल्क़ीस बानो उन दोनों को अपने पास बुलाती हैं। वह उन सब नामों के असली नाम पूछती है और जानना चाहती हैं कि उन्होंने उसका नाम क्या रखा है? मेहतरानी उसके सामने तो मना कर देती है लेकिन उसने बेगम बिल्कीस का जो नाम रखा होता है वह अपने शौहर के सामने ले देती है।

ख़ुदकुशी

सआदत हसन मंटो

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है जिसके यहाँ शादी के बाद बेटी का जन्म होता है। पर लाख कोशिश करने के बाद भी वह उसका कोई अच्छा सा नाम नहीं सोच पाता है। नाम की तलाश में वह डिक्शनरी ख़रीदता है, पर जब तक डिक्शनरी लेकर वह घर पहुँचता है तब तक बेटी मर चुकी होती है। बेटी के ग़म में कुछ ही दिनों बाद उसकी बीवी भी मर जाती है। ज़िंदगी के दिए इन सदमों से तंग आकर वह ख़ुदकुशी करने की सोचता है। वह रेलवे लाइन पर जाता है मगर वहाँ पहले से ही एक दूसरा शख़्स लाइन पर लेटा होता है। सामने से आ रही ट्रेन को देखकर वह उस शख़्स को बचा लेता है और उसे ऐसी बातें कहता है कि उन बातों से उसकी ख़ुद की ज़िंदगी पूरी तरह बदल जाती है।

निक्की

सआदत हसन मंटो

यह अफ़साना एक ऐसी औरत की दास्तान को बयान करता है जिसका मर्द हर वक़्त उसे मारा-पीटा करता था। फिर उसने एक तवायफ़ के कहने पर उसे तलाक़ दे दी। मर्द की पिटाई के बाद उस औरत में जो ग़ुस्सा और नफ़रत जमा हो गई थी वह नए मोहल्ले में आकर निकलने लगी। वह बात-बात पर पड़ोसियों से उलझने लगी, उनसे लड़ने लगी और फिर आगे चलकर उसने इस हुनर को अपना पेश बना लिया, अपने लड़ने की फ़ीस तय कर दी। लड़ना-झगड़ना उसके ख़ून में ऐसा रच-बस गया कि उसे दौरे पड़ने लगे और पड़ोसियों को गाली बकते हुए ही उसकी मौत हो गई।

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मजीद का माज़ी

सआदत हसन मंटो

ऐश-ओ-आराम में ज़िंदगी बसर करते हुए अपने अतीत को याद करने वाले एक अमीर शख़्स की कहानी है। वह अब बहुत अमीर है। उसके पास कोठी है, अच्छी तनख़्वाह है, बीवी-बच्चे हैं और हर तरह का आराम नसीब है। इन सब के बीच उसकी शांति न जाने कहाँ खो गई है। वह शांति जो उसे यह सब हासिल होने से पहले थी जब उसकी तनख़्वाह कम थी, बीवी-बच्चे नहीं थे, कारोबार था और न ही दूसरे झमेले। वह शांति से दो पैसे कमाता था और चैन से सोता था। अब सारे ऐश-ओ-आराम के बाद भी उसे वह शांति नसीब नहीं है।

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ख़ोरेश्ट

सआदत हसन मंटो

यह कहानी समाज के एक नाज़ुक पहलू को सामने लाता है। सरदार ज़ोरावर सिंह, सावक कापड़िया का लंगोटिया यार है। अपना अक्सर वक़्त उसके घर पर गुज़ारता है। दोस्त होने की वजह से उसकी बीवी ख़ुर्शीद से भी बे-तकल्लुफ़ी है। सरदार हर वक़्त ख़ुरशीद की आवाज़ की तारीफ़ करता है और उसके लिए मुनासिब स्टूडियो की तलाश में रहता है। अपने उन उपायों से वो ख़ुर्शीद को राम कर के उससे शादी कर लेता है।

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वो ख़त जो पोस्ट न किये गए

सआदत हसन मंटो

ये कहानी दस मुख़्तसर पत्रों का संग्रह है जो अलग-अलग अफ़राद को तंज़िया और नीम-मज़ाहिया अंदाज़ में लिखे गए हैं। पत्र लिखने वाला जो एक औरत है अपने जिस प्रिय को पत्र लिख रही है, की रोज़मर्रा की छोटी-छोटी ख़ामियों और कमियों की निशान-देही करती है।

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टेढ़ी लकीर

सआदत हसन मंटो

"एक आज़ादी पसंद, अज़ियत पसंद, साफ़-गो और डगर से हट कर कुछ अनोखा करने की धुन रखने वाले व्यक्ति की कहानी है जो अपनी इन्फ़िरादियत पसंदी के हाथों मजबूर हो कर एक रात अपनी निकाही बीवी को ही ससुराल से भगा ले जाता है।"

सोने की अंगूठी

सआदत हसन मंटो

"मियाँ-बीवी की नोक झोंक पर मब्नी मज़ाहिया कहानी है जिसमें बीवी शौहर को बड़े बालों की वजह से लानत-मलामत करती है। जब शौहर सैलून जाने के लिए तैयार हो जाता है तो कहती है अगर पैसे हों तो ज़रा एक सोने की अँगूठी ले आईएगा, मुझे एक सहेली की सालगिरह में जाना है।"

ख़ुशबूदार तेल

सआदत हसन मंटो

यह मालिक और घर में काम करने वाली नौकरानी के बीच चल रहे अवैध संबंधों पर आधारित कहानी है। दोनों मियाँ बीवी में किसी बात को लेकर कहा-सुनी हो जाती है। इसी कहा-सुनी में उसकी बीवी बताती है कि उसने नौकरानी को निकाल दिया है। जब वह इसका कारण पूछता है तो वह बताती है कि उसके सिर में से भी उसी तेल की ख़ुश्बू आती थी जो उसके मियाँ के सिर में से आ रही है।

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ताँगे वाले का भाई

सआदत हसन मंटो

कहानी एक ऐसे शख़्स की है जिसे जवानी में हुए एक हादसे के चलते औरत ज़ात से नफ़रत हो जाती है। वह उसकी जवानी की बहारों के दिन थे जब एक दिन अपने दोस्तों के साथ बैठा वह शराब पी रहा था कि अचानक ख़याल आया कि इस मौक़े पर कोई लड़की होनी चाहिए। दोस्तों के इसरार पर उसने एक ताँगे वाले से लड़की का इंतिज़ाम करने के लिए कहा। ताँगे वाला रात को एक बुर्क़ा-पोश को ताँगे में बिठा लाया। मगर कमरे में जाकर जब उसने उस औरत का नकाब खोला तो दंग रह गया। बुर्क़े में कोई औरत नहीं बल्कि हिजड़ा था, जिसने ख़ुद को ताँगे वाले का भाई बताया था।

ख़ाँ साहब

मोहम्मद मुजीब

कहानी एक ऐसे शख़्स के गिर्द घूमती है, जो बहुत दीनदार है मगर इतना कंजूस है कि उसकी बीवी-बेटी बहुत मुफ़्लिसी में गुज़ारा करती हैं। उसकी बीवी बेटी को अच्छी परवरिश के लिए एक औरत के पास छोड़ देती है, तो बदले में वह उस औरत से पैसे भी माँगता है। औरत पैसे तो नहीं देती, हाँ एक पढ़े-लिखे लड़के से उसका रिश्ता तय कर देती है। मगर कम मेहर और नकद न मिलने की वजह से वह धोखे से अपनी बेटी की शादी एक अमीर और अधेड़ उम्र के शख़्स से करा देता है।

नया मकान

मोहम्मद मुजीब

कहानी एक ऐसे शख़्स की है जो बीवी-बच्चों की मौत के बाद दुनिया को तर्क कर देता है और महज़ इबादत-गुज़ारी के लिए नया मकान बनवाना शुरू कर देता है। मकान की तामीर को देखने के लिए वह हर रोज़ वहाँ जाता है। एक दिन उसे वहाँ एक नौजवान मज़दूरन दिखाई देती है और वह उसकी मुस्कुराहट पर फ़िदा हो जाता है। धीरे-धीरे वह उसके साथ शादी करने और नए मकान में बस जाने के बारे में भी सोचने लगता है। मगर एक दिन उसे पता चलता है कि वह मज़दूरन एक दूसरे शख़्स के साथ भाग गई है।

शादी

अहमद अली

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है, जो पाँच साल तक पश्चिमी सभ्यता में पला-बढ़ा है। उसने वहाँ के साहित्य को पढ़ा और समाज में पूरी तरह रच बस गया है। जब वह हिंदुस्तान लौटता है तो परिवार वाले उसकी शादी करने के लिए कहते हैं मगर वह बिना देखे, मिले किसी लड़की से शादी करने पर राज़ी नहीं होता। तीन साल तक ना-नूकुर करने के बाद आख़िर-कार वह मान ही जाता है। शादी होने के बाद वह अनजान होने पर बीवी के पास जाने से कतराता है। फिर एक रात तन्हा लेटे हुए कुछ नॉवेल के हिस्से याद आते हैं और वह अपनी बीवी की चाहत में तड़प उठता है और उसके पास चला जाता है।

बुन बस्त

नैयर मसूद

"कहानी में दो ज़माने और दो अलग तरह के रवय्यों का टकराव नज़र आता है। कहानी का मुख्य पात्र अपने बे-फ़िक्री के ज़माने का ज़िक्र करता है जब शहर का माहौल पुर-सुकून था। दिन निकलने से लेकर शाम ढ़लने तक वो शहर में घूमता फिरता था लेकिन एक ज़माना ऐसा आया कि ख़ौफ़ के साये मंडलाने लगे, फ़सादात होने लगे। एक दिन वो बलवाइयों से जान बचा कर भागता हुआ एक तंग गली के तंग मकान में दाख़िल होता है तो उसे वो मकान पुर-असरार और उसमें मौजूद औरत खौफ़ज़दा मालूम होती है, इसके बावजूद उसके खाने पीने का इंतिज़ाम करती है, लेकिन ये उसके ख़ौफ़ की परवाह किए बिना दरवाज़ा खोल कर वापस लौट आता है।"

वो तरीक़ा तो बता दो तुम्हें चाहें क्योंकर?

हिजाब इम्तियाज़ अली

यह नौजवान मोहब्बत की कहानी है। एक नौजवान एक लड़की से बेहद मोहब्बत करता है लेकिन लड़की उसके मोहब्बत के इज़हार के हर ढंग को दक़ियानूसी, पुराना और बोर कहती रहती है। फिर एकाएक जब नौजवान उसे धमकी देता हुआ अपनी मोहब्बत का इज़हार करता है तो लड़की मान जाती है कि उसमें मोहब्बत को ज़ाहिर करने की सलाहियत मौजूद है।

मेहमान-दारी

हिजाब इम्तियाज़ अली

यह एक हॉरर क़िस्म की कहानी है। दो लड़कियाँ एक प्रोफे़सर के साथ समुंद्र के खंडहर की सैर के लिए रात का सफ़र तय कर दूसरे शहर जाते हैं। उस शहर में वे एक मादाम के घर में ठहरते हैं, लेकिन जब उस मादाम की हक़ीक़त का पता चलता है तो हालात दूसरा ही रुख़ इख्त़ियार कर लेते हैं।