आध्यात्मिकता

रूहानियत यक़ीनन कोई चीज़ है, आज के साईंस के ज़माने में जिसमें एटम बम तैयार किया जा सकता है और जरासीम फैलाए जा सकते हैं, ये चीज़ बाअज़ अस्हाब के नज़दीक मुहमल हो सकती है लेकिन वो लोग जो नमाज़ और रोज़े, आरती और कीर्तन से रुहानी तहारत हासिल करते हैं हम उन्हें पागल नहीं कह सकते। और मैं समझता हूँ कि बदकिर्दारों, क़ातिलों और सफ़्फ़ाकों की नजात का रास्ता सिर्फ़ रुहानी तालीम है, मुल्लाई तरीक़ पर नहीं, तरक़्क़ी-पसंद उसूलों पर।

सआदत हसन मंटो

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