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त्रास्दी पर कहानियाँ

टोबा टेक सिंह

सआदत हसन मंटो

इस कहानी में प्रवासन की पीड़ा को विषय बनाया गया है। देश विभाजन के बाद जहां हर चीज़ का आदान-प्रदान हो रहा था वहीं क़ैदीयों और पागलों को भी स्थानान्तरित करने की योजना बनाई गई। फ़ज़लदीन पागल को सिर्फ़ इस बात से सरोकार है कि उसे उसकी जगह 'टोबा टेक सिंह' से जुदा न किया जाये। वो जगह चाहे हिन्दुस्तान में हो या पाकिस्तान में। जब उसे जबरन वहां से निकालने की कोशिश की जाती है तो वह एक ऐसी जगह जम कर खड़ा हो जाता है जो न हिन्दुस्तान का हिस्सा है और न पाकिस्तान का और उसी जगह पर एक ऊँची चीख़ के साथ औंधे मुँह गिर कर मर जाता है।

कफ़न

प्रेमचंद

यह एक बहुस्तरीय कहानी है, जिसमें घीसू और माधव की बेबसी, अमानवीयता और निकम्मेपन के बहाने सामन्ती औपनिवेशिक गठजोड़ के दौर की सामाजिक आर्थिक संरचना और उसके अमानवीय/नृशंस रूप का पता मिलता है। कहानी में कफ़न एक ऐसे प्रतीक की तरह उभरता है जो कर्मकाण्डवादी व्यवस्था और सामन्ती औपनिवेशिक गठजोड़ के लिए समाज को मानसिक रूप से तैयार करता है।

औलाद

सआदत हसन मंटो

ये औलाद न होने के दुख में पागल हो गई एक औरत की कहानी है। ज़ुबैदा की शादी के बाद ही उसके बाप की मौत हो गई तो वह अपनी माँ को अपने घर ले आई। माँ-बेटी एक साथ रहने लगीं तो माँ को इस बात की चिंता हुई कि उसकी बेटी को अभी तक बच्चा क्यों नहीं हुआ। बच्चे के लिए माँ ने बेटी का हर तरह का इलाज कराया, पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। माँ दिन-रात उसे औलाद न होने के ताने देती रहती है तो उसका दिमाग़़ चल जाता है और हर तरफ़ उसे बच्चे ही नज़र आने लगते हैं। उसके इस पागलपन को देखकर उसका शौहर एक नवजात शिशु को उसकी गोद में लाकर डाल देता है। जब उसके लिए उसकी छातियों से दूध नहीं उतरता है तो वह उस्तरे से अपनी छातियों को काटती जिससे उसकी मौत हो जाती है।

बाँझ

सआदत हसन मंटो

आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई कहानी। बंबई के अपोलो-बंदर पर टहलते हुए एक दिन उस शख्स से मुलाकात हुई। मुलाक़ात के दौरान ही मोहब्बत पर गुफ़्तुगू होने लगी है। आप चाहे किसी से भी मोहब्बत कीजिए, मोहब्बत मोहब्बत ही होती है। वह किसी बच्चे की तरह पैदा होती है और हमल की तरह गिर भी जाती है। यानी पैदा होने से पहले ही मर भी सकती है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चाहकर भी मोहब्बत नहीं कर पाते हैं और ऐसे लोग बाँझ होते हैं।

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बदसूरती

सआदत हसन मंटो

यह दो बहनों, हामिदा और साजिदा की कहानी है। साजिदा बहुत ख़ूबसूरत है, जबकि हामिदा बहुत बदसूरत है। साजिदा को एक लड़के से मोहब्बत हो जाती है, तो हामिदा को बहुत दुःख होता है। इस बात को लेकर उन दोनों के बीच झगड़ा भी होता है, पर फिर दोनों बहनें सुलह कर लेती है और साजिदा की शादी हामिद से हो जाती है। एक साल बाद साजिदा अपने शौहर के साथ हामिदा से मिलने आती है। रात को कुछ ऐसा होता है कि सुबह होते ही हामिद साजिदा को तलाक़़ दे देता है और कुछ अरसे बाद हामिदा से शादी कर लेता है।

बादशाहत का ख़ात्मा

सआदत हसन मंटो

"सौन्दर्य व आकर्षण के इच्छुक एक ऐसे बेरोज़गार नौजवान की कहानी है जिसकी ज़िंदगी का अधिकतर हिस्सा फ़ुटपाथ पर रात बसर करते हुए गुज़रा था। संयोगवश वो एक दोस्त के ऑफ़िस में कुछ दिनों के लिए ठहरता है जहां एक लड़की का फ़ोन आता है और उनकी बातचीत लगातार होने लगती है। मोहन को लड़की की आवाज़ से इश्क़ है इसलिए उसने कभी उसका नाम, पता या फ़ोन नंबर जानने की ज़हमत नहीं की। दफ़्तर छूट जाने की वजह से उसकी जो 'बादशाहत' ख़त्म होने वाली थी उसका विचार उसे सदमे में मुब्तला कर देता है और एक दिन जब शाम के वक़्त टेलीफ़ोन की घंटी बजती है तो उसके मुँह से ख़ून के बुलबुले फूट रहे होते हैं।"

अल्लाह दत्ता

सआदत हसन मंटो

"फ़साद में लुटे पिटे हुए एक ऐसे घर की कहानी है जिसमें एक बाप अपनी बेटी से मुँह काला करता है और फिर अपने दिवंगत भाई की बेटी को बहू बना कर लाता है तो उससे भी ज़बरदस्ती करने की कोशिश करता है लेकिन जब उसकी बेटी को पता चलता है तो वो अपने भाई से तलाक़ दिलवा देती है क्योंकि वो अपनी सौत नहीं देख सकती थी।"

पेशावर एक्सप्रेस

कृष्ण चंदर

भारत-पाकिस्तान विभाजन पर लिखी गई एक बहुत दिलचस्प कहानी। इसमें घटना है, दंगे हैं, विस्थापन है, लोग हैं, उनकी कहानियाँ, लेकिन कोई भी केंद्र में नहीं है। केंद्र में है तो एक ट्रेन, जो पेशावर से चलती है और अपने सफ़र के साथ बँटवारे के बाद हुई हैवानियत की ऐसी तस्वीर पेश करती है कि पढ़ने वाले की रुह काँप जाती है।

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क्वारंटीन

राजिंदर सिंह बेदी

कहानी में एक ऐसी वबा के बारे में बताया गया है जिसकी चपेट में पूरा इलाक़ा है और लोगों की मौत निरंतर हो रही है। ऐसे में इलाके़ के डॉक्टर और उनके सहयोगी की सेवाएं प्रशंसनीय हैं। बीमारों का इलाज करते हुए उन्हें एहसास होता है कि लोग बीमारी से कम और क्वारंटीन से ज़्यादा मर रहे हैं। बीमारी से बचने के लिए डॉक्टर खु़द को मरीज़ों से अलग कर रहे हैं जबकि उनका सहयोगी भागू भंगी बिना किसी डर और ख़ौफ़ के दिन-रात बीमारों की सेवा में लगा हुआ है। इलाक़े से जब महामारी ख़त्म हो जाती है तो इलाक़े के गणमान्य की तरफ़ से डॉक्टर के सम्मान में जलसे का आयोजन किया जाता है और डॉक्टर के काम की तारीफ़ की जाती है लेकिन भागू भंगी का ज़िक्र तक नहीं होता।

शतरंज की बाज़ी

प्रेमचंद

कहानी 1856 के अवध नवाब वाजिद अली शाह के दो अमीरों के इर्द-गिर्द घूमती है। ये दोनों खिलाड़ी शतरंज खेलने में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें अपने शासन तथा परिवार की भी फ़िक्र नहीं रहती। इसी की पृष्ठभूमि में अंग्रेज़ों की सेना अवध पर चढ़ाई कर देती है।

आवारा-गर्द

कुर्रतुलऐन हैदर

दुनिया की सैर पर निकले एक यूरोपीय जर्मन लड़के की कहानी। वह पाकिस्तान से भारत आता है और बंबई में एक सिफ़ारिशी मेज़बान का मेहमान बनता है। बंबई में वह कई दिन रुकता है, लेकिन सारा सफ़र पैदल ही तय करता है। रात को खाने की मेज़ पर अपनी मेज़बान से वह यूरोप, जर्मन, द्वितीय विश्व युद्ध, नाज़ी और अपने अतीत के बारे में बात करता है। भारत से वह श्रीलंका जाता है जहाँ सफ़र में एक सिंघली बौद्ध उसका दोस्त बन जाता है। वह दोस्त उसे नदी में नहाने की दावत देता है और खु़द डूबकर मर जाता है। लंका से होता हुआ है वह सैलानी लड़का वियतनाम जाता है। वियतनाम में जंग जारी है और जंग की एक गोली उस नौजवान यूरोपीय आवारागर्द को भी लील जाती है।

नजात

प्रेमचंद

‘नजात’ कहानी हिंदी में 'सद्गति' के नाम से प्रकाशित हुई थी। एक ज़रूरतमंद, कई दिनों का भूखा-प्यासा ग़रीब चमार किसी काम से ठाकुर के यहाँ आता है। ठाकुर उसे लकड़ी काटने के काम पर लगा देता है। सख़्त गर्मी से बेहाल वह लकड़ी काटता है और अपनी थकान मिटाने के लिए बीच-बीच में चिलम पीता रहता है। लेकिन काम ख़त्म होने से पहले ही वह इतना थक जाता है कि मर जाता है। उस मरे हुए चमार की लाश से ठाकुर जिस तरह जान छुड़ाता है वह बहुत मार्मिक है।

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हरनाम कौर

सआदत हसन मंटो

अपने ज़माने में ताक़त और अपने बल के चलते मशहूर रहे एक सिख जट की कहानी। अब उसके पास केवल एक बेटा बहादुर सिंह है जिसकी परवरिश बीवी की मौत के बाद उसकी बहन ने की थी। मगर बहादुर सिंह में वह बात नहीं थी जो निहाल सिंह चाहता था। वह उसकी शादी को लेकर परेशान था। मगर बहादुर सिंह गाँव की किसी भी लड़की में दिलचस्पी ही नहीं लेता था। आख़िर में निहाल सिंह ने विभाजन के बाद पाकिस्तान जाने वाले काफ़िले से बहादुर सिंह के लिए एक लड़की लूट ली। उसने उसे बहादुर सिंह के कमरे में डाल कर दरवाज़ा बंद कर दिया। मगर जब उसने सुबह दरवाज़ा खोला तो सामने बहादुर सिंह सूट-सलवार पहने बैठा था और क़ाफ़िले वाली लड़की चारपाई के नीचे से निकल कर बाहर भाग गई।

अन्न-दाता

कृष्ण चंदर

बंगाल में जब अकाल पड़ा तो शुरू में हुक्मरानों ने इसे क़हत मानने से ही इंकार कर दिया। वे हर रोज़ शानदार दावतें उड़ाते और उनके घरों के सामने भूख से बेहाल लोग दम तोड़ते रहते। वह भी उन्हीं हुक्मरानों में से एक था। शुरू में उसने भी दूसरों की तरह समस्या से नज़र चुरानी चाही। मगर फिर वह उनके लिए कुछ करने के लिए उतावला हो गया। कई योजनाएँ बनाई और उन्हें अमल में लाने के लिए संघर्ष करने लगा।

पेशावर से लाहौर तक

सआदत हसन मंटो

जावेद पेशावर से ही ट्रेन के ज़नाना डिब्बे में एक औरत को देखता चला आ रहा था और उसके हुस्न पर फ़िदा हो रहा था। रावलपिंडी स्टेशन के बाद उसने जान-पहचान बढ़ाई और फिर लाहौर पहुँचने तक उसने सैकड़ों तरह के मंसूबे बना डाले। लाहौर पहुँच कर जब उसे मालूम हुआ कि वह एक वेश्या है तो वह उलटे पाँव रावलपिंडी वापस हो गया।

हारता चला गया

सआदत हसन मंटो

एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसे जीतने से ज़्यादा हारने में मज़ा आता है। बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद फ़िल्मी दुनिया में उसने बे-हिसाब दौलत कमाई थी। यहाँ उसने इतनी दौलत कमाई कि वह जितना ख़र्च करता उससे ज़्यादा कमा लेता। एक रोज़ वह जुआ खेलने जा रहा था कि उसे इमारत के नीचे ग्राहकों को इंतज़ार करती एक वेश्या मिली। उसने उसे दस रूपये रोज़ देने का वादा किया, ताकि वह अपना धंधा बंद कर सके। कुछ दिनों बाद उसने देखा कि वह वेश्या फिर खिड़की पर बैठी ग्राहक का इंतेज़ार कर रही। पूछने पर उसने ऐसा जवाब दिया कि वे व्यक्ति ला-जवाब हो कर ख़ामोश हो गया।

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महमूदा

सआदत हसन मंटो

औरत जब बुरी होती है वह इसीलिए बुरी नहीं होती कि वह बुरी है। बल्कि वह इसलिए बुरी होती है क्योंकि मर्द उसे बुरा बनाते हैं। बड़ी-बड़ी आँखों वाली महमूदा एक बहुत खू़बसूरत लड़की थी। उसकी शादी भी बड़ी धूमधाम से हुई थी लेकिन अपने शौहर के नकारापन की वजह से वह इस धँधे में उतर जाती है।

आपा

मुमताज़ मुफ़्ती

कहानी एक ऐसी लड़की की दास्तान बयान करता है जो जले हुए उपले की तरह है। बाहर से राख का ढ़ेर मगर अंदर चिंगारियाँ हैं। घर के कामों में बंधी उसकी ज़िंदगी ख़ामोशी से गुज़र रही थी कि उसकी फुप्पो का बेटा तसद्दुक़ उनके यहाँ रहने चला आया। वह उसे पसंद करने लगी और उसकी फ़रमाइशों के मुताबिक़ ख़ुद को ढालती चली गई। मगर जब जीवन साथी चुनने की बारी आई तो तसद्दुक़ ने उसे छोड़कर सज्जो बाजी से शादी कर ली।

ये ग़ाज़ी ये तेरे पुर-अस्रार बन्दे

कुर्रतुलऐन हैदर

यह कहानी पश्चिमी जर्मनी में जा रही एक ट्रेन से शुरू होती है। ट्रेन में पाँच लोग सफ़र कर रहे हैं। उनमें एक ब्रिटिश प्रोफे़सर है और उसके साथ उसकी बेटी है। साथ में एक कनाडाई लड़की और एक ईरानी प्रोफेसर हैं। शुरू में सब ख़ामोश बैठे रहते हैं। फिर धीरे-धीरे आपस में बातचीत करने लगता है। बातचीत के दौरान ही कनाडाई लड़की ईरानी प्रोफे़सर को पसंद करने लगती है। ट्रेन का सफ़र ख़त्म होने के बाद भी वे मिलते रहते हैं और अपने ख़ानदानी शजरों की उधेड़-बुन में लगे रहते हैं। उसी उधेड़-बुन में वे एक-दूसरे के क़रीब आते हैं और एक ऐसे रिश्ते में बंध जाते हैं जिसे कोई नाम नहीं दिया जाता। चारों तरफ जंग का माहौल है। ईरान में आंदोलन हो रहे हैं। इसी बीच एक दिन एयरपोर्ट पर धमाका होता है। उस बम-धमाके में ईरानी प्रोफे़सर और उसके साथी मारे जाते हैं। उस हादसे का कनाडाई लड़की पर जो असर पड़ता है वही इस कहानी का निष्कर्ष है।

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सेराज

सआदत हसन मंटो

यह एक ऐसी नौजवान वेश्या की कहानी है, जो किसी भी ग्राहक को ख़ुद को हाथ नहीं लगाने देती। हालाँकि जब उसका दलाल उसका सौदा किसी से करता है, तो वह ख़ुशी-ख़ुशी उसके साथ चली जाती है, लेकिन जैसे ही ग्राहक उसे कहीं हाथ लगाता है कि अचानक वह उससे झगड़ने लगती है। दलाल उसकी इस हरकत से बहुत परेशान रहता है, पर वह उसे ख़ुद से अलग भी नहीं कर पाता है, क्योंकि वह उससे मोहब्बत करने लगा है। एक दिन वह दलाल को लेकर लाहौर चली जाती है। वहाँ वह उस नौजवान से मिलती है, जो उसे घर से भगाकर एक सराय में अकेला छोड़ गया था।

ख़ुदकुशी

सआदत हसन मंटो

यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसके यहाँ शादी के बाद बेटी का जन्म होता है। लाख कोशिशों के बाद भी वह उसका कोई अच्छा सा नाम नहीं सोच पाता है। नाम की तलाश के लिए वह डिक्शनरी ख़रीदता है, पर जब तक डिक्शनरी लेकर वह घर पहुँचता है तब तक बेटी की मौत हो चुकी होती है। बेटी की मौत के दुख में कुछ ही दिनों बाद उसकी पत्नी की भी मृत्यु हो जाती है। ज़िंदगी के दिए उन दुखों से तंग आकर वह आत्महत्या करने की सोचता है। इस उद्देश्य से वह रेलवे लाइन पर जाता है मगर वहाँ पहले से ही एक दूसरा व्यक्ति लाइन पर लेटा होता है। सामने से आ रही ट्रेन को देखकर वह उस व्यक्ति को बचा लेता है और उस से ऐसी बातें कहता है कि उन बातों से उसकी ख़ुद की ज़िंदगी पूरी तरह बदल जाती है।

डरपोक

सआदत हसन मंटो

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है जो औरत की शदीद ख़्वाहिश होने के चलते रंडीख़ाने पर जाता है। उसने अभी तक की अपनी ज़िंदगी में किसी औरत को छुआ तक नहीं था। न ही उसने अभी तक किसी से इज़हार-ए-मोहब्बत किया था। ऐसा नहीं था कि उसे कभी कोई मौक़ा न मिला हो। मगर उसे जब भी कोई मौक़ा मिला वह किसी अनजाने ख़ौफ़़ के चलते उस पर अमल न कर सका। मगर पिछले कुछ दिनों से उसे औरत की बेहद ख़्वाहिश हो रही थी। इसलिए वह उस जगह तक चला आया था। रंडीख़ाना उससे एक गली दूर था, पर पता नहीं किस डर के चलते उस गली को पार नहीं कर पा रहा था। अंधेरे में तन्हा खड़ा हुआ वह आस-पास के माहौल को देखता है और अपने डर पर क़ाबू पाने की कोशिश करता है। मगर इस से पहले कि वह डर को अपने क़ाबू में करे, डर उसी पर हावी हो गया और वह वहाँ से ऐसे ही ख़ाली हाथ लौट गया।

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शादाँ

सआदत हसन मंटो

यह कहानी अमीर घरों के मर्दों द्वारा उनके यहाँ काम करने वाली ग़रीब, पीड़ित और कमसिन लड़कियों के यौन शोषण पर आधारित है। ख़ान बहादुर मोहम्मद अस्लम ख़ान बहुत संतुष्ट और ख़ुशहाल ज़िंदगी गुज़ार रहे थे। उनके तीन बच्चे थे, जो स्कूल के बाद सारा दिन घर में शोर-गु़ल मचाते रहते थे। उन्हीं दिनों एक ईसाई लड़की शादां उनके घर में काम करने आने लगी। वह भी बच्ची थी, पर अचानक ही उसमें जवानी के रंग-ढंग दिखने लगे। फिर एक रोज़ ख़ान साहब को शादां के बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। शादां तो उसी रोज़ मर गई थी और ख़ान साहब भी सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे।

मिस्टर मोईनुद्दीन

सआदत हसन मंटो

सामाजिक रसूख़ और साख के गिर्द घूमती यह कहानी मोईन-नामी व्यक्ति के वैवाहिक जीवन पर आधारित है। मोईन ने ज़ोहरा से उसके माँ-बाप के ख़िलाफ़ जाकर शादी की थी और फिर कराची में आ बसा था। कराची में उसकी बीवी का एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति के साथ सम्बंध हो जाता है। मोईन इस बारे में जानता है लेकिन अपनी मोहब्बत और सामाजिक साख के कारण वह बीवी को तलाक नहीं देता और उसे प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दे देता है। कुछ अरसे बाद जब प्रेमी की मौत हो जाती है तो मोईन भी उसे तलाक दे देता है।

हुस्न की तख़लीक़

सआदत हसन मंटो

यह एक ऐसे जोड़ी की कहानी है, जो अपने समय में सबसे ख़ूबसूरत और ज़हीन जोड़ी थी। दोनों की मोहब्बत की शुरुआत कॉलेज के दिनों में हुई थी। फिर पढ़ाई के बाद उन्होंने शादी कर ली। अपनी बे-मिसाल ख़ूबसूरती के कारण वे अपने आने वाले बच्चे की ख़ूबसूरती के बारे में सोचने लगे। होने वाले बच्चे की ख़ूबसूरती की सोच उनके ज़ेहन पर कुछ इस तरह हावी हो गई कि वे दिन-रात उसी के बारे में बातें किया करते। फिर उनके यहाँ बच्चा पैदा भी हुआ, लेकिन वह कोई साधारण बच्चा नहीं था बल्कि अपने आप में एक नमूना था।

मोमबत्ती के आँसू

सआदत हसन मंटो

यह एक ग़ुर्बत की ज़िंदगी गुज़ारती वेश्या की कहानी है। उसके घर में अंधेरा है। ताक़ में रखी मोमबत्ती मोम को पिघलाती हुई जल रही है। उसकी छोटी बच्ची मोतियों का हार माँगती है तो वह फ़र्श पर जमे मोम को धागे में पिरो कर माला बनाकर उसके गले में पहना देती है। रात में उसका ग्राहक आता है। उससे अलग होने पर वह थक जाती है, तभी उसे अपनी बच्ची का ध्यान आता है और वह उसके छोटे पलंग के पास जाकर उसे अपनी बाँहों में भर लेती है।

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मेरा हमसफ़र

सआदत हसन मंटो

अलीगढ़ से अमृतसर लौटते एक छात्र की कहानी है। वह ट्रेन में सवार हुआ तो उसे अलविदा कहने आए उसके साथी ने उससे कोई ऐसी बात कही कि उसने उसे पागल कहकर झटक दिया। ट्रेन में उसके साथ सफ़र कर रहे नौजवान ने सोचा कि वह उसे पागल कह रहा है। बात करने पर पता चला कि वह नौजवान अपने घर से सिर्फ़ इसलिए निकल आया है क्योंकि उसका यहूदी बाप उसे पागल कहता है। इसी कारण उसकी बीवी भी उसे छोड़कर अपने मायके चली जाती है।

परेशानी का सबब

सआदत हसन मंटो

यह अफ़साना एक ऐसे शख़्स की दास्तान बयान करता है जो अपने एक दोस्त के साथ घूमने जा रहा होता है। रास्ते में उसका दोस्त एक वेश्या के घर रुक जाता है। वहाँ उस वेश्या के साथ उनका झगड़ा हो जाता है। वेश्या उन सब लोगों के ख़िलाफ़़ मुक़द्दमा कर देती है। इस मुकद्दमे के चलते वह एक ऐसी परेशानी में घिर जाता है जिससे निकलने का उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आता।

मिस एडना जैक्सन

सआदत हसन मंटो

यह एक कॉलेज की ऐसी प्रिंसिपल की कहानी है, जिसने अपनी छात्रा के बॉय फ्रेंड से ही शादी कर ली थी। जब वो कॉलेज में आई तो छात्राओं ने उसे बिल्कुल मुँह नहीं लगाया था। हालाँकि अपने व्यवहार और ख़ुलूस के चलते वह जल्दी ही छात्राओं के बीच लोकप्रिय हो गई। इसी बीच उसे एक लड़की की मोहब्बत का पता चला, जो एक लेक्चरर से प्यार करती थी। लड़की की पूरी दास्तान सुनने के बाद प्रिंसिपल ने लेक्चरर को अपने घर बुलाया और फिर अपने से आधी उम्र के उस नौजवान के साथ शादी कर ली।

क़ीमे की बजाय बोटियाँ

सआदत हसन मंटो

एक मद्रासी डॉक्टर के दूसरे प्रेम-विवाह की त्रासदी पर आधारित कहानी। वह डॉक्टर बेहद बेतकल्लुफ़ था। अपने दोस्तों पर बेहिसाब ख़र्च किया करता था। तभी उसकी एक औरत से दोस्ती हो गई जो उस से पहले अपने तीन शौहरों को तलाक़़ दे चुकी थी। डॉक्टर ने कुछ अरसे बाद उससे शादी कर ली। मगर जल्द ही उनके बीच झगड़े होने लगे। उस औरत ने अपनी नौकरानियों और उनके शौहरों से डॉक्टर की पिटाई करा दी। बदले में डॉक्टर ने उनके टुकड़े-टुकड़े कर के लोगों को दावत में खिला दिया।

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महावटों की एक रात

अहमद अली

महावटों की रात है और घनघोर बरसात हो रही है। एक ग़रीब परिवार जिसमें तीन छोटे बच्चे भी हैं एक छोटे कमरे में सिमटे-सिकुड़े लेटे हुए हैं। घर की छत चू रही है। ठंड लग रही है और भूख से पेटों में चूहे कूद रहे हैं। बच्चों की अम्मी अपनी पुराने दिनों को याद करती है और सोचती है कि शायद वह जन्नत में है। जब बच्चे बार-बार उससे खाने के लिए कहते हैं तो वह उसके बारे में सोचती है और कहती है कि अगर वह होता तो कुछ न कुछ खाने के लिए लाता।

तक़ी कातिब

सआदत हसन मंटो

अफ़साना एक ऐसे मौलाना की दास्तान बयान करता है जो अपने जवान बेटे की शादी के ख़िलाफ़़ है। जवानी में उसकी बीवी की मौत हो गई थी और उसने ही बेटे को माँ और बाप दोनों बनकर पाला था। मगर अब वह जवान हो गया था और उसे एक औरत की शदीद ज़रूरत थी। पर मौलाना थे कि उसकी शादी ही नहीं करना चाहते थे। जहाँ भी उसकी शादी की बात चलती, वह किसी न किसी बहाने से उसे रुकवा देते। आख़िर में उसने मौलाना के ख़िलाफ़़ जाकर शादी कर ली और उन्हें छोड़कर दिल्ली चला गया। वहाँ जाकर उसने अपने मौलवी पिता की ख़ैरियत जानने के लिए ख़त लिखा और साथ ही सलाह दी कि वह भी अपनी शादी कर लें।

रहमान के जूते

राजिंदर सिंह बेदी

जूते के ऊपर जूते चढ़ जाने को किसी सफ़र से जोड़ कर अँधविश्वास को बयान करती एक मर्मस्पर्शी कहानी। खाना खाते वक्त रहमान का जूता दूसरे जूते पर चढ़ा तो उसकी बीवी ने कहा कि उसे अपनी बेटी जीना से मिलने जाना है। जीना से मिलने जाने के लिए उसकी माँ ने बहुत सारी तैयारियाँ कर रखी थीं। फिर वह अपनी बेटी से मिलने के लिए सफ़र पर निकल पड़ा और सफ़र में उसके सामान की गठरी कहीं गुम हो जाती है जिसके लिए वह एक कांस्टेबल से उलझ जाता है। ज़ख़्मी हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। वहाँ भी उसका जूता दूसरे पर चढ़ा हुआ है जो इस बात का इशारा था कि वह अब एक लंबे सफ़र पर जाने वाला है।

मिलावट

सआदत हसन मंटो

यह एक ईमानदार और साफ़ तबीयत के आदमी की कहानी है। उसने अपनी ज़िंदगी में कभी धोखा-धड़ी नहीं की थी। वह अपनी ज़िंदगी से ख़ुश था। उसने शादी करने की सोची मगर शादी में उसके साथ धोखा हुआ। इसके बाद वह जहाँ भी गया उसके साथ धोखा ही होता रहा। फिर उसने भी लोगों को धोखा देने की ठान ली। आख़िर में ज़िंदगी से तंग आकर उसने मरने की सोची और आत्महत्या के लिए उसने जो ज़हर ख़रीदा, उसमें भी मिलावट थी, जिसकी वजह से वह बच गया।

घोगा

सआदत हसन मंटो

अफ़साना अस्पताल में भर्ती ऐसे मरीज़़ की दास्तान बयान करता है जो वहाँ से दवाइयाँ चोरी कर के अपनी बहन को दिया करता है। उसकी इन हरकतों का अस्पताल की सभी नर्सों को पता है, फिर भी वे किसी को कुछ नहीं बताती हैं। इन्हीं में से एक नर्स मिस जैकब भी है, जिसे कोई घास नहीं डालता है। मगर जिस दिन वह मरीज़़ अस्पताल से रुख़स्त हुआ, उसी दिन मिस जैकब भी ग़ायब हो गई। पर दो दिन बाद ही वह लौट आई। वह पहले की तरह से चुप-चुप थी। बस उसके कानों की सोने की बालियाँ ग़ायब हो गईं थीं।

शैदा

सआदत हसन मंटो

यह अमृतसर के एक मशहूर गुंडे की अपनी ग़ैरत के लिए एक पुलिस वाले का क़त्ल कर देने की कहानी है। शैदा का सिद्धांत था कि जब भी लड़ो दुश्मन के इलाक़े में जाकर लड़ो। वह लड़ाई भी उसने पटरंगों के मोहल्ले में जाकर की थी, जिसके लिए उसे दो साल की सजा हुई थी। उस लड़ाई में पटरंगो की एक लड़की उस पर फ़िदा हो गई थी। जेल से छूटने पर जब वह उससे शादी की तैयारी कर रहा था तो एक पुलिस वाले ने उस लड़की का रेप कर के मार दिया। बदले में शैदा ने उस पुलिस वाले का सिर कुल्हाड़ी से काटकर धड़ से अलग कर दिया।

शुग़ल

सआदत हसन मंटो

यह कहानी अमीरों के शौक़ और उनकी दिलचस्पियों के गिर्द घूमती है। एक पहाड़ी इलाक़े में कुछ मज़दूर पत्थर साफ़ करने का काम किया करते थे। वहाँ सड़क से गुज़रने वाली तरह-तरह की लारियाँ ही उनके मनोरंजन का साधन थीं। एक रोज़ वहाँ एक नई गाड़ी आकर रुकी, उसमें से दो नौजवान उतरे और एक चमार की बेटी को अपने साथ लेकर चल दिए। ठेकेदार ने उन नौजवानों के रसूख़ को बयान करते हुए बताया कि यह तो अपने शुग़ल के लिए उस लड़की को ले जा रहे हैं, कुछ देर बाद उसे छोड़ जाएँगे।

सुना है आलम-ए-बाला में कोई कीमिया-गर था

कुर्रतुलऐन हैदर

एक ऐसी शख्स की कहानी जो मोहब्बत तो करता है मगर उसका इज़हार करने की कभी हिम्मत नहीं कर पाता। पड़ोसी होने के बावजूद वह परिवार में एक फ़र्द की तरह रह रहा था और जहाँ-जहाँ वालिद साहब की पोस्टिंग होती रही मिलने आता रहा। ख़ानदान वाले सोचते रहे कि वह उनकी छोटी बेटी से मोहब्बत करता है। मगर वे तो उनकी बड़ी बेटी से मोहब्बत करता है। उसकी ख़्वाहिश थी कि काश, वह उसे एक बार ‘डार्लिंग’ कह सके।

माई जनते

सआदत हसन मंटो

इस कहानी में घर में काम करने वाली आया का मालिकों का विश्वास जीतने, उनका शुभ चिंतक बनने और फिर उस विश्वास का दुरूपयोग करने के दोहरे चरित्र को उजागर किया गया है। ख़्वाज़ा करीम बख़्श की मौत के बाद उनकी विधवा हमीदा ने अपनी दो बेटियों की सारी ज़िम्मेदारी माई जनते को दे दी थी। वही लड़कियों के सारे काम किया करती थी। उन्हें कॉलेज ले जाती और लाती। जब उनमें से एक लड़की की शादी हुई तो निकाह के बाद पता चला कि वह उनकी लड़कियों से धंधा भी करवाती थी।

नफ़्सियाती मुताला

सआदत हसन मंटो

इस कहानी में एक ऐसी लेखिका की दास्तान बयान की गई है जो मर्दों की मनोविज्ञान के बारे में लिखने के कारण मशहूर हो जाती है। कुछ लेखक दोस्त बैठे हैं और उसी लेखिका बिल्क़ीस के बारे में बातचीत कर रहे हैं। लेखक जिस घर में बैठे हैं उस घर की महिला बिल्क़ीस की दोस्त हैं। बातचीत के बीच में ही फ़ोन आता है और वह महिला बिल्क़ीस से मिलने चली जाती है। बिल्क़ीस उसे बताती है कि वह घर में सफ़ेदी कर रहे एक मज़दूर की मनोविज्ञान का अध्ययन कर रही थी, इसी बीच उसने उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया।

हयातीन-बे

राजिंदर सिंह बेदी

ग़रीबी पर मब्नी कहानी है। विटामिन बी की कमी की वजह से मातादीन मज़दूर की बीवी मनभरी के पुट्ठों में वर्म आ जाता है। मेस का एक मुलाज़िम अच्छी ख़ुराक और खाने का वादा करके मातादीन और मनभरी को अपने यहाँ मुलाज़िम रखवा लेता है और मनभरी का यौन शोषण करता है। जब मातादीन को इसकी ख़बर होती है तो वो वहाँ की नौकरी छोड़ देता है और एक दिन डाक्टर के यहाँ से विटामिन बी चोरी करने की वजह से हवालात में क़ैद हो जाता है। वो ख़ुश था कि मनभरी अब एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी लेकिन उसे पता नहीं था कि अत्यधिक दुखी होने के कारण मनभरी का गर्भपात हो गया है।

प्रेम कहानी

अहमद अली

मोहब्बत का इज़हार करना भी उतना ही ज़रूरी है जितना की मोहब्बत करना है। अगर आप इज़हार नहीं करेंगे तो अपने हाथों अपनी मोहब्बत का क़त्ल कर देंगे। यह कहानी भी एक ऐसे ही क़त्ल की दास्तान है। नायक एक लड़की से बे-पनाह मोहब्बत करता है। एक दिन वह उसके साथ एक साईकिल ट्रिप पर भी जाता है। मौसम बहुत खु़शगवार है लेकिन वह चाहने के बाद भी इज़हार नहीं कर पाता है। उसके इज़हार न करने के कारण लड़की उससे दूर हो जाती है और फिर कभी उसके पास नहीं आती है। हालांकि वह उससे बीच-बीच में मुलाक़ात करती है। मोहब्बत करने और उसका इज़हार न करने पर इंसान की क्या हालत होती है वह आप इस कहानी को पढ़ कर जान सकते हैं।

दो मुंही

मुमताज़ मुफ़्ती

कहानी दोहरे चरित्र से जूझती एक ऐसी औरत के गिर्द घूमती है, जो बाहरी तौर पर तो कुछ और दिखाई देती है मगर उसके अंदर कुछ और ही चल रहा होता है। अपनी इस शख़्सियत से परेशान वह बहुत से डॉक्टरों से इलाज कराती है मगर कोई फ़ायदा नहीं होता। फिर उसकी एक सहेली उसे त्याग क्लीनिक के बारे में बताती है और वह अपने शौहर से हिल स्टेशन पर घूमने का कहकर अकेले ही त्याग क्लीनिक में इलाज कराने के लिए निकल पड़ती है।

लार्वे

राजिंदर सिंह बेदी

अज़ीज़-उद-दीन एक ग़रीब नौकरी पेशा शख़्स है। अपने झोंपड़े के बाहर बने गड्ढे में लार्वों को देखकर उसके ज़ेहन में कई तरह के ख़यालात आते हैं। उन लार्वों को ज़िंदा रखने के लिए वो हर मुम्किन कोशिश करता है कि गड्ढे में गंदा पानी जमा रहे क्योंकि साफ़ पानी में लार्वे मर जाते हैं। उसकी बीवी अज़ीज़ा को मजिस्ट्रेट प्रीतम दास बतौर ख़ादिमा अपने साथ कश्मीर ले जाते हैं लेकिन वहाँ से तार आता है कि अज़ीज़ा को पहाड़ का सेहतमंद पानी रास न आया। वो डायरिया और पेचिश की शिकायत में मुब्तिला हो कर अचानक मर गई। अज़ीज़-उद-दीन के मुँह से बस इतना ही निकला, ऐ ख़ुदा तू अपनी बारिश को थाम ले।