ऑडियो

शायरी- शायरों की आवाज़ में

अब्दुल अहद साज़

16

सबक़ उम्र का या ज़माने का है

बे-मसरफ़ बे-हासिल दुख

हर इक लम्हे की रग में दर्द का रिश्ता धड़कता है

जाने क़लम की आँख में किस का ज़ुहूर था

बंद फ़सीलें शहर की तोड़ें ज़ात की गिरहें खोलें

यूँ भी दिल अहबाब के हम ने गाहे गाहे रक्खे थे

मौत से आगे सोच के आना फिर जी लेना

हम अपने ज़ख़्म कुरेदते हैं वो ज़ख़्म पराए धोते थे

दरख़्त रूह के झूमे परिंद गाने लगे

खिले हैं फूल की सूरत तिरे विसाल के दिन

बहुत मलूल बड़े शादमाँ गए हुए हैं

लफ़्ज़ों के सहरा में क्या मा'नी के सराब दिखाना भी

ख़राब-ए-दर्द हुए ग़म-परस्तियों में रहे

खुली जब आँख तो देखा कि दुनिया सर पे रक्खी है

मिज़ाज-ए-सहल-तलब अपना रुख़्सतें माँगे

जीतने मारका-ए-दिल वो लगातार गया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अब्दुल हमीद

12

कितनी महबूब थी ज़िंदगी कुछ नहीं कुछ नहीं

किसी दश्त ओ दर से गुज़रना भी क्या

साए फैल गए खेतों पर कैसा मौसम होने लगा

एक ख़ुदा पर तकिया कर के बैठ गए हैं

कुछ अपना पता दे कर हैरान बहुत रक्खा

पाँव रुकते ही नहीं ज़ेहन ठहरता ही नहीं

उसे देख कर अपना महबूब प्यारा बहुत याद आया

एक मिश्अल थी बुझा दी उस ने

किसी का क़हर किसी की दुआ मिले तो सही

कभी देखो तो मौजों का तड़पना कैसा लगता है

दिल में जो बात है बताते नहीं

अजीब शय है कि सूरत बदलती जाती है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अबुल हसनात हक़्क़ी

6

बे-नियाज़-ए-दहर कर देता है इश्क़

तमाम हिज्र उसी का विसाल है उस का

दिल को हम दरिया कहें मंज़र-निगारी और क्या

शब को हर रंग में सैलाब तुम्हारा देखें

शिकस्त-ए-अहद पर इस के सिवा बहाना भी क्या

ये इक और हम ने क़रीना किया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अदीब सहारनपुरी

1

बख़्शे फिर उस निगाह ने अरमाँ नए नए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अहमद फ़राज़

15

ये शहर सेहर-ज़दा है सदा किसी की नहीं

दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

ख़्वाबों के ब्योपारी

मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलेख़ा तपाक चाहता है

मैं तो मक़्तल में भी क़िस्मत का सिकंदर निकला

जान से इश्क़ और जहाँ से गुरेज़

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की

सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते

वहशतें बढ़ती गईं हिज्र के आज़ार के साथ

हम भी शाएर थे कभी जान-ए-सुख़न याद नहीं

ऐ मेरे सारे लोगो

हच-हाईकर

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अहमद नदीम क़ासमी

9

पत्थर

लब-ए-ख़ामोश से इफ़्शा होगा

हर लम्हा अगर गुरेज़-पा है

जब तिरा हुक्म मिला तर्क मोहब्बत कर दी

जी चाहता है फ़लक पे जाऊँ

पाबंदी

क़लम दिल में डुबोया जा रहा है

कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा

मुदावा हब्स का होने लगा आहिस्ता आहिस्ता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अहमद सलमान

3

जो दिख रहा उसी के अंदर जो अन-दिखा है वो शाइरी है

जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे

शबनम है कि धोका है कि झरना है कि तुम हो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

ऐन ताबिश

11

आँसुओं के रतजगों से

ख़ाकसारी थी कि बिन देखे ही हम ख़ाक हुए

मेरी तन्हाई के एजाज़ में शामिल है वही

हयात-ए-सोख़्ता-सामाँ इक इस्तिअा'रा-ए-शाम

इक शहर था इक बाग़ था

यहाँ के रंग बड़े दिल-पज़ीर हुए हैं

बदलने का कोई मौसम नहीं होता

ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ

घनी सियह ज़ुल्फ़ बदलियों सी बिला सबब मुझ में जागती है

वही जुनूँ की सोख़्ता-जानी वही फ़ुसूँ अफ़्सानों का

आवारा भटकता रहा पैग़ाम किसी का

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अजमल सिराज

4

दीवार याद आ गई दर याद आ गया

घूम-फिर कर इसी कूचे की तरफ़ आएँगे

पेश जो आया सर-ए-साहिल शब बतलाया

हम अपने-आप में रहते हैं दम में दम जैसे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अख़लाक़ अहमद आहन

2

अकेले अकेले ही पा ली रिहाई

तिरी आश्नाई से तेरी रज़ा तक

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अख़तर मुस्लिमी

1

कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अख़्तर-उल-ईमान

19

सिलसिले

एक लड़का

तब्दीली

ए'तिमाद

काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम

तन्हाई में

बिंत-ए-लम्हात

राह-ए-फ़रार

दूर की आवाज़

इत्तिफ़ाक़

उरूस-उल-बिलाद

उम्र-ए-गुरेज़ाँ के नाम

डासना स्टेशन का मुसाफ़िर

नया आहंग

शीशा का आदमी

आख़िरी मुलाक़ात

मेरा दोस्त अबुल-हौल

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

गूँगी औरत

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

आलम ख़ुर्शीद

2

हर घर में कोई तह-ख़ाना होता है

जब तक खुली नहीं थी असरार लग रही थी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

आलमताब तिश्ना

1

गिनती में बे-शुमार थे कम कर दिए गए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अली अकबर नातिक़

1

हुजूम-ए-गिर्या

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अली सरदार जाफ़री

7

अक़ीदे बुझ रहे हैं शम-ए-जाँ ग़ुल होती जाती है

तुम नहीं आए थे जब

निवाला

चाँद को रुख़्सत कर दो

शिकस्त-ए-शौक़ को तकमील-ए-आरज़ू कहिए

काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा

मेरा सफ़र

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अल्लामा इक़बाल

1

इबलीस की मजलिस-ए-शूरा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

आलोक मिश्रा

6

चीख़ की ओर मैं खिंचा जाऊँ

हम मुसलसल इक बयाँ देते हुए

बुझती आँखों में तिरे ख़्वाब का बोसा रक्खा

वो बे-असर था मुसलसल दलील करते हुए

जाने किस बात से दुखा है बहुत

जज़्ब कुछ तितलियों के पर में है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

आलोक यादव

1

सरापा तिरा क्या क़यामत नहीं है?

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अमीर इमाम

10

ये कार-ए-ज़िंदगी था तो करना पड़ा मुझे

शहर में सारे चराग़ों की ज़िया ख़ामोश है

ख़ुद को हर आरज़ू के उस पार कर लिया है

यूँ मिरे होने को मुझ पर आश्कार उस ने किया

कभी तो बनते हुए और कभी बिगड़ते हुए

काँधों से ज़िंदगी को उतरने नहीं दिया

बन के साया ही सही सात तो होती होगी

वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका

मज़ीद इक बार पर बार-ए-गिराँ रक्खा गया है

कि जैसे कोई मुसाफ़िर वतन में लौट आए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अनीस अशफ़ाक़

3

रू-ए-गुल चेहरा-ए-महताब नहीं देखते हैं

कब इश्क़ में यारों की पज़ीराई हुई है

हमेशा किसी इम्तिहाँ में रहा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अनवर जलालपुरी

4

पराया कौन है और कौन अपना सब भुला देंगे

ज़ुल्फ़ को अब्र का टुकड़ा नहीं लिख्खा मैं ने

मैं हर बे-जान हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ को गोया बनाता हूँ

क़याम-गाह न कोई न कोई घर मेरा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अनवर मसूद

1

सर-दर्द में गोली ये बड़ी ज़ूद-असर है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अनवर शऊर

1

यादों के बाग़ से वो हरा-पन नहीं गया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अरशद कमाल

18

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

तलातुम है न जाँ-लेवा भँवर है

हम ज़ीस्त की मौजों से किनारा नहीं करते

ज़माना कुछ भी कहे तेरी आरज़ू कर लूँ

समुंदर से किसी लम्हे भी तुग़्यानी नहीं जाती

दर्द की साकित नदी फिर से रवाँ होने को है

सच की ख़ातिर सब कुछ खोया कौन लिखेगा

ज़माना कुछ भी कहे तेरी आरज़ू कर लूँ

हम ज़ीस्त की मौजों से किनारा नहीं करते

तलातुम है न जाँ-लेवा भँवर है

हर एक लम्हा-ए-ग़म बहर-ए-बे-कराँ की तरह

हर एक लम्हा-ए-ग़म बहर-ए-बे-कराँ की तरह

सच की ख़ातिर सब कुछ खोया कौन लिखेगा

कभी जो उस की तमन्ना ज़रा बिफर जाए

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

समुंदर से किसी लम्हे भी तुग़्यानी नहीं जाती

दर्द की साकित नदी फिर से रवाँ होने को है

कभी जो उस की तमन्ना ज़रा बिफर जाए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

आरज़ू लखनवी

8

वो सर-ए-बाम कब नहीं आता

क्यूँ किसी रह-रौ से पूछूँ अपनी मंज़िल का पता

हम आज खाएँगे इक तीर इम्तिहाँ के लिए

दूर थे होश-ओ-हवास अपने से भी बेगाना था

हुस्न से शरह हुई इश्क़ के अफ़्साने की

नज़र उस चश्म पे है जाम लिए बैठा हूँ

दिल में याद-ए-बुत-ए-बे-पीर लिए बैठा हूँ

मिरी निगाह कहाँ दीद-ए-हुस्न-ए-यार कहाँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अशफ़ाक़ हुसैन

5

इतना बे-नफ़अ नहीं उस से बिछड़ना मेरा

तेरे पहलू में तिरे दिल के क़रीं रहना है

गिरती है तो गिर जाए ये दीवार-ए-सुकूँ भी

दिल इक नई दुनिया-ए-मआनी से मिला है

ज़रा ज़रा ही सही आश्ना तो मैं भी हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अशोक लाल

15

यतीम इंसाफ़

महकती हुई तन्हाइयाँ

रौशनाई

घर वापसी

नींद

सफ़र

आईने में ख़म आया

बुनियादें

विरासत

बासी रिश्ते

जाने क्यूँ

रघुपति राघव राजा राम

अपने अशआ'र भूल जाता हूँ

मेरे एहसास मेरे विसवास

परिक्रमा तवाफ़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

असरार-उल-हक़ मजाज़

2

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अता आबिदी

7

साँसों के तआक़ुब में हैरान मिली दुनिया

तमाशा ज़िंदगी का रोज़ ओ शब है

तीरगी शम्अ बनी राहगुज़र में आई

ख़्वाब की दिल्ली

तुझ को ख़िफ़्फ़त से बचा लूँ पानी

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अतहर नफ़ीस

1

बे-नियाज़ाना हर इक राह से गुज़रा भी करो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अज़हर इनायती

10

फ़िक्र में हैं हमें बुझाने की

जाने आया था क्यूँ मकान से मैं

नज़र की ज़द में सर कोई नहीं है

घर तो हमारा शो'लों के नर्ग़े में आ गया

क़यामत आएगी माना ये हादिसा होगा

वो मुझ से मेरा तआ'रुफ़ कराने आया था

किताबें जब कोई पढ़ता नहीं था

हक़ीक़तों का नई रुत की है इरादा क्या

हर एक रात को महताब देखने के लिए

तमाम शख़्सियत उस की हसीं नज़र आई

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अज़ीज़ अन्सारी

2

हम उस को भूल बैठे हैं अँधेरे हम पे तारी हैं

घुट घुट कर मर जाना भी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

1

अपनी बीती हुई रंगीन जवानी देगा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

अज़ीज़ नबील

5

सुब्ह और शाम के सब रंग हटाए हुए हैं

ख़ाक चेहरे पे मल रहा हूँ मैं

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

मैं दस्तरस से तुम्हारी निकल भी सकता हूँ

आँखों के ग़म-कदों में उजाले हुए तो हैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बदनाम नज़र

2

दीवार-ओ-दर का नाम था कोई मकाँ न था

हयात ढूँढ रहा हूँ क़ज़ा की राहों में

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बशीर बद्र

4

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बेकल उत्साही

1

उधर वो हाथों के पत्थर बदलते रहते हैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़हमीदा रियाज़

12

ज़बानों का बोसा

आलम-ए-बर्ज़ख़

पत्थर की ज़बान

इस गली के मोड़ पर

अक़्लीमा

दिल्ली तिरी छाँव…

तिफ़्लाँ की तो कुछ तक़्सीर न थी

नज़्र-ए-फ़िराक़

एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोश

ख़ाकम-ब-दहन

बाकिरा

मेघ दूत

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

37

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग

ऐ रौशनियों के शहर

तौक़-ओ-दार का मौसम

बुनियाद कुछ तो हो

रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे

दरीचा

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं

हम जो तारीक राहों में मारे गए

दुआ

किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया

सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

रंग है दिल का मिरे

सोचने दो

जब तेरी समुंदर आँखों में

चंद रोज़ और मिरी जान

वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं

गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो

तराना

मुलाक़ात

कहाँ जाओगे

ख़त्म हुई बारिश-ए-संग

तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है

शीशों का मसीहा कोई नहीं

पास रहो

न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया

दो इश्क़

बोल

किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे

अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें

लहू का सुराग़

दर्द आएगा दबे पाँव

निसार मैं तेरी गलियों के

यहाँ से शहर को देखो

ज़िंदाँ की एक शाम

शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़ना निज़ामी कानपुरी

1

या रब मिरी हयात से ग़म का असर न जाए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़रहत एहसास

9

कभी हँसते नहीं कभी रोते नहीं कभी कोई गुनाह नहीं करते

हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है

जिस्म की कुछ और अभी मिट्टी निकाल

जिस्म के पार वो दिया सा है

तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता

अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है

उस तरफ़ तू तिरी यकताई है

सूने सियाह शहर पे मंज़र-पज़ीर मैं

मैं रोना चाहता हूँ ख़ूब रोना चाहता हूँ मैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़ारूक़ बख़्शी

6

ये सौदा इश्क़ का आसान सा हे

इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

रेज़ा रेज़ा सा भला मुझ में बिखरता क्या हे

वो चाँद-चेहरा सी एक लड़की

वो बस्ती याद आती है

इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़सीह अकमल

12

ये वो सफ़र है जहाँ ख़ूँ-बहा ज़रूरी है

किसी के सामने इस तरह सुर्ख़-रू होगी

प्यार जादू है किसी दिल में उतर जाएगा

चश्म-ए-हैरत को तअल्लुक़ की फ़ज़ा तक ले गया

जो तू नहीं है तो लगता है अब कि तू क्या है

मुनव्वर जिस्म-ओ-जाँ होने लगे हैं

ग़ुबार-ए-तंग-ज़ेहनी सूरत-ए-ख़ंजर निकलता है

दे गया लिख कर वो बस इतना जुदा होते हुए

मुद्दत से वो ख़ुशबू-ए-हिना ही नहीं आई

कुछ नया करने की ख़्वाहिश में पुराने हो गए

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है

किताबों से न दानिश की फ़रावानी से आया है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़ातिमा हसन

9

क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं

मिरी ज़मीं पे लगी आप के नगर में लगी

मनाज़िर ख़ूब-सूरत हैं

अच्छा लगता है

कौन ख़्वाहिश करे कि और जिए

मेरी बेटी चलना सीख गई

नज़्म

ख़्वाब गिरवी रख दिए आँखों का सौदा कर दिया

आँखों में न ज़ुल्फ़ों में न रुख़्सार में देखें

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

फ़ाज़िल जमीली

5

सुख़न जो उस ने कहे थे गिरह से बाँध लिए

सरहदें

ख़िज़ाँ का रंग दरख़्तों पे आ के बैठ गया

दरख़्तों के लिए

कहीं से नीले कहीं से काले पड़े हुए हैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

ग़ुफ़रान अमजद

4

कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया

कोई दो चार नहीं महव-ए-तमाशा सब हैं

अजब था ज़ोम कि बज़्म-ए-अज़ा सजाएँगे

अभी आइना मुज़्महिल है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

हबीब जालिब

8

रेफ़्रेनडम

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना

हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम

बड़े बने थे 'जालिब' साहब पिटे सड़क के बीच

दस्तूर

मुशीर

शेर से शाइरी से डरते हैं

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

हम्माद नियाज़ी

1

दिल के सूने सहन में गूँजी आहट किस के पाँव की

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

हुसैन माजिद

4

धूल-भरी आँधी में सब को चेहरा रौशन रखना है

तूफ़ाँ कोई नज़र में न दरिया उबाल पर

शाम छत पर उतर गई होगी

लोगों ने आकाश से ऊँचा जा कर तमग़े पाए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Added to your favorites

Removed form your favorites