आज के चुनिन्दा 5 शेर

वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था

कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए

राजेन्द्र मनचंदा बानी

वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र था

वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं

मैं जो उन से रूठ जाऊँ तो पयाम तक पहुँचे

शकील बदायुनी

इन अंधेरों से परे इस शब-ए-ग़म से आगे

इक नई सुब्ह भी है शाम-ए-अलम से आगे

इशरत क़ादरी

मैं रोज़ इधर से गुज़रता हूँ कौन देखता है

मैं जब इधर से गुज़रूँगा कौन देखेगा

मजीद अमजद
  • शेयर कीजिए
आज का शब्द

नाख़ुदा

  • naaKHudaa
  • ناخدا

शब्दार्थ

Sailor

गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो

डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

महत्वपूर्ण आधुनिक शायर और फ़िल्म गीतकार। अपनी ग़ज़ल ' कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ' के लिए प्रसिध्द

वालिद की वफ़ात पर

तुम्हारी क़ब्र पर

पूर्ण नज़्म देखें
पसंदीदा विडियो
This video is playing from YouTube

क़ाज़ी अबदुस्सत्तार

Urdu Afsane Ki Zinda Haqiqat |Jashn-e-Rekhta 2017

इस विडियो को शेयर कीजिए

ई-पुस्तकें

January

सय्यद सुलैमान नदवी 

1930 Marif,Azamgarh

Urdu Drama Ka Irtiqa

इशरत रहमानी 

1978 आलोचना

अमृत सागर उर्दू

पंडित प्यारे लाल कशमीरी 

1939 औषिधि

मजमूआ-ए-मर्सिया मीर मोनिस

मीर मूनिस लखनवी 

1881 मर्सिया

शेर शोर अंगेज़

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी 

1990 आलोचना

अन्य ई-पुस्तकें

नया क्या है

हम से जुड़िये

न्यूज़लेटर

* रेख़्ता आपके ई-मेल का प्रयोग नियमित अपडेट के अलावा किसी और उद्देश्य के लिए नहीं करेगा

Added to your favorites

Removed from your favorites