आज के चुनिन्दा 5 शेर

मुड़ के देखा तो हमें छोड़ के जाती थी हयात

हम ने जाना था कोई बोझ गिरा है सर से

ज़ाहिदा ज़ैदी

हज़ार रुख़ तिरे मिलने के हैं मिलने में

किसे फ़िराक़ कहूँ और किसे विसाल कहूँ

रविश सिद्दीक़ी

एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं

वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद
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कोई क्यूँ किसी का लुभाए दिल कोई क्या किसी से लगाए दिल

वो जो बेचते थे दवा-ए-दिल वो दुकान अपनी बढ़ा गए

बहादुर शाह ज़फ़र
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जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़

उन का दावा है कि वो अस्ल ख़ुदा वाले हैं

अब्दुल हमीद अदम
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आज का शब्द

कहकशाँ

  • kahkashaa.n
  • کہکشاں

शब्दार्थ

Galaxy

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

महान उर्दू शायर एवं पाकिस्तान के राष्ट्र-क़वि जिन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा ' के अतिरिक्त 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसे गीत की रचना की

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हरबंस मुखिया

Cultural and Literary Interaction in Medieval India l Jashn-e-Rekhta 2017

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