आज के चुनिन्दा 5 शेर

इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

फ़रहत एहसास
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ

दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

परवीन शाकिर

बुरी सरिश्त बदली जगह बदलने से

चमन में के भी काँटा गुलाब हो सका

आरज़ू लखनवी
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अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

तेरी सूरत में है क्या जो मेरी सूरत में नहीं

असग़र गोंडवी

जब जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर

तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूँ नहीं आते

इबरत मछलीशहरी
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आज का शब्द

फ़क़त

  • faqat
  • فقط

शब्दार्थ

merely/ only

अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

कुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद और राजकवि , मिर्ज़ा ग़ालिब से उनकी प्रतिद्वंदिता प्रसिद्ध है।

सब को दुनिया की हवस ख़्वार लिए फिरती है

कौन फिरता है ये मुर्दार लिए फिरती है

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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प्रेम चोपड़ा

Bollywood Veteran Prem Chopra at Jashn-e-Rekhta 2017

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