आज के चुनिन्दा 5 शेर

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

मुस्तफ़ा ज़ैदी

इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ

जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से

साहिर लुधियानवी

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

हर बात में लज़्ज़त है अगर दिल में मज़ा हो

अमीर मीनाई
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क्यूँ परखते हो सवालों से जवाबों को 'अदीम'

होंट अच्छे हों तो समझो कि सवाल अच्छा है

अदीम हाशमी

करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम

मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
आज का शब्द

जौर

  • jaur
  • جور

शब्दार्थ

tyranny/ oppression

आप पछताएँ नहीं जौर से तौबा करें

आप के सर की क़सम 'दाग़' का हाल अच्छा है

शब्दकोश
आर्काइव

जश्न

जन्मदिन

दाग़ देहलवी के समकालीन। अपनी ग़ज़ल ' सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता ' के लिए प्रसिद्ध हैं।

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी सकूँ

ढूँडने उस को चला हूँ जिसे पा भी सकूँ

The one that I desire, this heart cannot displace

The one who is unattainable I seek to embrace

The one that I desire, this heart cannot displace

The one who is unattainable I seek to embrace

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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इन्तिज़ार हुसैन

In conversation with Asif Farrukhi : Jashn-e-Rekhta-2015

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