आज के चुनिन्दा 5 शेर

'ज़ौक़' तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर

आराम में है वो जो तकल्लुफ़ नहीं करता

save trouble, in formality, zauq nothing else can be

at ease he then remains he who, eschews formality

save trouble, in formality, zauq nothing else can be

at ease he then remains he who, eschews formality

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है

जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

बशीर बद्र
  • शेयर कीजिए

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं

हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

जिगर मुरादाबादी
  • शेयर कीजिए

जिस भी फ़नकार का शहकार हो तुम

उस ने सदियों तुम्हें सोचा होगा

अहमद नदीम क़ासमी
  • शेयर कीजिए

ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं

ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

माहिर-उल क़ादरी
  • शेयर कीजिए
आज का शब्द

ज़ीस्त

  • ziist
  • زیست

शब्दार्थ

life, existence

इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया

दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

my being did, from love's domain, the joy of life procure

obtained such cure for life's travails, which itself had no cure

my being did, from love's domain, the joy of life procure

obtained such cure for life's travails, which itself had no cure

शब्दकोश

क्या आप जानते हैं?

कृष्ण

कृश्न चन्दर (1913-1977) उर्दू के मशहूर और महत्त्वपूर्ण लेखकों  में शामिल हैं। उन्होंने गद्य की हर विधा में नित नए अंदाज़ से लिखा है। लगभग 300 कहानियों 47 उपन्यासों और बहुत से नाटकों के लेखक हैं, जिन में उनकी यादगार साहित्यिक रचनाएं और आर्थिक आवश्यकताओं के अधीन लिखे उपन्यास और कहानियां दोनों शामिल हैं। उनकी पहली रचना "मिस्टर ब्लैकी" हाई स्कूल में अपने कठोर और ख़ूब ठुकाई करने वाले फ़ारसी के उस्ताद मास्टर बुलाक़ी राम का व्यंग्य रेखाचित्र था, जो दीवान सिंह मफ़्तून के साप्ताहिक "रियासत" दिल्ली में प्रकाशित हो कर बहुत मशहूर हुआ था, लेकिन कृश्न चन्दर के पिता बहुत नाराज़ हुए थे और शिक्षा के दौरान लिखने-लिखाने से मना कर दिया था। अंग्रेज़ी से एम.ए. के बाद कृश्न चन्दर का पहला अफ़साना "यरक़ान" अदबी दुनिया लाहौर के वार्षिकी में प्रकाशित हुआ था।

आर्काइव

आज की प्रस्तुति

पाकिस्तानी शायर , अपनी ग़ज़ल ' कल चौदहवीं की रात ' थी , के लिए प्रसिद्ध

दिल इश्क़ में बे-पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो

दरिया हो तो ऐसा हो सहरा हो तो ऐसा हो

पूर्ण ग़ज़ल देखें

रेख़्ता ब्लॉग

पसंदीदा विडियो
This video is playing from YouTube

ख़लील-उर-रहमान आज़मी

Main Kaun Tha | Khalil Ur Rahman Azmi Shayari | Rekhta Studio

इस विडियो को शेयर कीजिए

ई-पुस्तकें

Kulliyat-e-Anwar Shaoor

अनवर शऊर 

2015 महाकाव्य

Mughal Tahzeeb

महबूब-उल्लाह मुजीब 

1965

Shumara Number-002

डॉ. मोहम्मद हसन 

1970 असरी अदब

Audhoot Ka Tarana

 

1958 नज़्म

Iqbal Dulhan

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी 

1908 शिक्षाप्रद

अन्य ई-पुस्तकें

नया क्या है

हम से जुड़िये

न्यूज़लेटर

* रेख़्ता आपके ई-मेल का प्रयोग नियमित अपडेट के अलावा किसी और उद्देश्य के लिए नहीं करेगा