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अनवर मसूद

Jashn-e-Rekhta 2016

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आज के टॉप 5

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

हर बात में लज़्ज़त है अगर दिल में मज़ा हो

अमीर मीनाई
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क्यूँ पशेमाँ हो अगर वअ'दा वफ़ा हो सका

कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं

इबरत मछलीशहरी
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मिरी अपनी और उस की आरज़ू में फ़र्क़ ये था

मुझे बस वो उसे सारा ज़माना चाहिए था

बुशरा एजाज़

सियह-बख़्ती में कब कोई किसी का साथ देता है

कि तारीकी में साया भी जुदा रहता है इंसाँ से

इमाम बख़्श नासिख़
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सुने जाते थे तुम से मिरे दिन रात के शिकवे

कफ़न सरकाओ मेरी बे-ज़बानी देखते जाओ

फ़ानी बदायुनी
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आर्काइव
आज का शब्द

मुंसिफ़

  • munsif
  • منصف

शब्दार्थ

judge

मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है

क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा

my killer is himself my judge upon this day

how then will he decide in my favour pray?

my killer is himself my judge upon this day

how then will he decide in my favour pray?

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आर्काइव

आज की प्रस्तुति

प्रसिद्ध फ़िल्म गीतकार और शायर

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा दे

मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ दे

My companion, my intimate, be not a friend and yet betray

The pain of love is fatal now, for my life please do not pray

My companion, my intimate, be not a friend and yet betray

The pain of love is fatal now, for my life please do not pray

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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