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प्रसून जोशी

Urdu and its influence-Prasoon Joshi &Faridoon Shahryar: Jashn e Rekhta-2017

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आज के टॉप 5

और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ

दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह

जाँ निसार अख़्तर

दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से

कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से

जलील ’आली’

भला हुआ कि कोई और मिल गया तुम सा

वगर्ना हम भी किसी दिन तुम्हें भुला देते

ख़लील-उर-रहमान आज़मी

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले

हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

कैफ़ भोपाली

एक आँसू ने डुबोया मुझ को उन की बज़्म में

बूँद भर पानी से सारी आबरू पानी हुई

a single tear caused my fall in her company

just a drop of water drowned my dignity

a single tear caused my fall in her company

just a drop of water drowned my dignity

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
आर्काइव
आज का शब्द

ज़र्द

  • zard
  • زرد

शब्दार्थ

Pale

था ज़िंदगी में मर्ग का खटका लगा हुआ

उड़ने से पेश-तर भी मिरा रंग ज़र्द था

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आर्काइव

जश्न

जन्मदिन

अग्रणी एवं प्रख्यात प्रगतिशील शायर, रोमांटिक और क्रांतिकारी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, ऑल इंडिया रेडियो की पत्रिका “आवाज” के पहले संपादक, मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के मामा

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

इस सई-ए-करम को क्या कहिए बहला भी गए तड़पा भी गए

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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मोहब्बत आसमाँ है

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी 

2006 काव्य संग्रह

See Para-e-Dil

ख़्वाजा हसन निज़ामी 

1916 नॉन-फ़िक्शन

कुल्लियात-ए-मजाज़

असरार-उल-हक़ मजाज़ 

2006 महाकाव्य

शुमारा नम्बर-003

अली साहिल 

नज़्म-ए-नौ

इंद्रा

राय बहादुर बाबू बंकम चन्द्र चेटरजी 

1921 नॉवेल / उपन्यास

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