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Angare

1932 में प्रकाशित होने वाली किताब ''अंगारे'' अपनी सम्मिलित सामग्री के कारण विवादित किताब बन गई। उस कहानी संग्रह में सज्जाद ज़हीर, अहमद अली, महमूद-उल-ज़फ़र और रशीद जहां की कहानियां शामिल हैं। उन कहानियों में मुस्लिम मज़हबी रहनुमाओं पर आलोचना की गई है और उस ज़माने के सामाजिक उत्पीड़न को उजागर किया गया है। किताब के प्रकाशन के बाद इतना वावेला मचा कि ब्रिटिश उपनिवेशवादी सरकार की तरफ़ से पाबंदी लगा दी गई।
उर्दू साहित्य में इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद नई प्रवृत्ति शुरू हुई जिसके प्रभाव से अभिव्यक्ति की आज़ादी के साथ कहानियां लिखी गईं और उसी के बाद उर्दू साहित्य में प्रगतिशील आंदोलन की शुरुआत भी होती है। लोगों का ख़्याल है कि ये किताब प्रगतिशील आंदोलन की भुमिका भी साबित हुई।