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Ismat

'इस्मत' उर्दू की मात्र मासिक पत्रिका है, जिसने अपने प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे किए हैं। महिलाओं की पत्रिका में यह एक मील के पत्थर की हैसियत रखती है। यह पत्रिका दिल्ली से 1908 में शुरू हुई थी। इसके संपादक अल्लामा राशिद-उल-ख़ैरी ने महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता के अभियान के रूप में इस पत्रिका के लिए अपना समस्त जीवन समर्पित कर दिया था। सरकारी नौकरी छोड़ी, पैतृक आवास बेच दिया, बेगम के ज़ेवरात बेच दिए,बहू जो सामान दहेज में लायी थी, वह भी उसमें लगा दिया। पत्रिका के कार्यालय में कई बार आग भी लगी, यह पत्रिका जारी रही। उसमें परिवारिक विषयों से लेकर विश्व राजनीति तक के बारे में आलेख प्रकाशित होते थे। अल्लामा के देहावसान के बाद उनके बेटे राज़िक़-उल-ख़ैरी ने पाकिस्तान जा कर भी पत्रिका का प्रकाशन जारी रखा। उनकेे देहांत के बाद उनकी बेगम आमिना नाज़ली संपादक रहीं और फिर उनकी औलादों ने यह ज़िम्मेदारी निभाई। अपने आरंभिक दिनों में इस पत्रिका ने महिला लेखिकाओं का एक समूह पैदा किया जिसमें नज़्र सज्जाद हैदर, सोग़रा हुमायूं,अतिया फ़ैज़ी, हिजाब इम्तियाज़ अली जैसे नाम भी शामिल हैं। राज़िक़-उल-ख़ैरी की किताब 'इस्मत की कहानी' में पत्रिका के बारे में बहुत सी दिलचस्प मालूमात हैं। उन्होंने लिखा है कि इस्मत को आर्थिक कठिनाइयां थीं लेकिन इश्तिहार के बारे में यह सिद्धांत था कि सिर्फ़ वो विज्ञापन प्रकाशित होंगे जो एक शरीफ़ बेटी अपने बाप के सामने और शरीफ़ बहन अपने भाई के सामने पढ़ सके।