aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
शब्दार्थ
बाल-ओ-पर भी गए बहार के साथ
अब तवक़्क़ो नहीं रिहाई की
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ कवि अपने आपको पिंजरे में बंद पक्षी की तरह मानता है। बसंत आम तौर पर नई जान और उड़ान का संकेत है, लेकिन उसी के साथ पंखों का चले जाना सबसे बड़ी हानि है। पंख शक्ति, साधन और उम्मीद के प्रतीक हैं; जब वे ही नहीं रहे तो मुक्ति की संभावना भी नहीं बचती। भाव है गहरी टूटन और स्थायी निराशा।
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ कवि अपने आपको पिंजरे में बंद पक्षी की तरह मानता है। बसंत आम तौर पर नई जान और उड़ान का संकेत है, लेकिन उसी के साथ पंखों का चले जाना सबसे बड़ी हानि है। पंख शक्ति, साधन और उम्मीद के प्रतीक हैं; जब वे ही नहीं रहे तो मुक्ति की संभावना भी नहीं बचती। भाव है गहरी टूटन और स्थायी निराशा।
"यार ने हम से बे-अदाई की" ग़ज़ल से की मीर तक़ी मीर