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मीर तक़ी मीर

1722-23 - 1810 | Delhi, India

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

ग़ज़ल 353

शेर 177

तन के मामूरे में यही दिल-ओ-चश्म

घर थे दो सो ख़राब हैं दोनों

दिल कि यक क़तरा ख़ूँ नहीं है बेश

एक आलम के सर बला लाया

मत रंजा कर किसी को कि अपने तो ए'तिक़ाद

दिल ढाए कर जो काबा बनाया तो क्या हुआ

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रुबाई 106

मर्सिया 34

मीरियात 1671

क़सीदा 8

क़ितआ 26

ई-पुस्तक 109

अफ़्कार-ए-मीर

 

1996

अहसन-उल-इंतिख़ाब

 

1936

Asaleeb-e-Meer

 

1963

Ashar-e-Meer

 

1953

Ashar-e-Mir

 

1935

बा दरिया-ए-इश्क़

 

 

Bayan-e-Meer

 

2013

Deewan-e-Meer

Nushkha-e-Mahmoodabad

1973

दीवान-ए-मीर

भाग-002

 

दीवान-ए-मीर

खण्ड-001

 

चित्र शायरी 18

वीडियो 35

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

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चलते हो तो चमन को चलिए कहते हैं कि बहाराँ है

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देख तो दिल कि जाँ से उठता है

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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

भारती विश्वनाथन

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

लता मंगेशकर

फ़क़ीराना आए सदा कर चले

सुरैया

मुँह तका ही करे है जिस तिस का

मेहदी हसन

मीरियात - दीवान नंo- 4, ग़ज़ल नंo- 1523

बेगम अख़्तर

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

पंकज उदास

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

सी एच आत्मा

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

सलीम रज़ा

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

छाया गांगुली

हस्ती अपनी हबाब की सी है

फ़रीदा ख़ानम

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

ग़ुलाम अली

ऑडियो 30

इश्क़ में नय ख़ौफ़-ओ-ख़तर चाहिए

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

कुछ मौज-ए-हवा पेचाँ ऐ 'मीर' नज़र आई

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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