- पुस्तक सूची 177688
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ86
बाल-साहित्य1989
नाटक / ड्रामा919 एजुकेशन / शिक्षण344 लेख एवं परिचय1379 कि़स्सा / दास्तान1582 स्वास्थ्य105 इतिहास3278हास्य-व्यंग607 पत्रकारिता202 भाषा एवं साहित्य1706 पत्र738
जीवन शैली30 औषधि980 आंदोलन272 नॉवेल / उपन्यास4300 राजनीतिक354 धर्म-शास्त्र4755 शोध एवं समीक्षा6601अफ़साना2680 स्केच / ख़ाका242 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2038पाठ्य पुस्तक451 अनुवाद4248महिलाओं की रचनाएँ5831-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1278
- दोहा48
- महा-काव्य100
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1257
- हाइकु11
- हम्द52
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1599
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात580
- माहिया20
- काव्य संग्रह4854
- मर्सिया386
- मसनवी746
- मुसद्दस42
- नात580
- नज़्म1193
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा182
- क़व्वाली17
- क़ित'अ67
- रुबाई272
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
अब्दुस्समद की कहानियाँ
नजात
यह कहानी बच्चों की यौन शिक्षा पर बात करती है। अगर बच्चों को सेक्स के बारे में पता नहीं होगा तो उम्र बढ़ने के साथ साथ वे अपने शरीर में होने वाले बदलाव के बारे में भी नहीं जान सकेंगे। उसके साथ भी कुछ ऐसा ही था। पूरा परिवार एक कमरे के घर में रहता था और उसमें जो कुछ रात के अंधेरे में होता था, वह सब जानती थी लेकिन उसके बारे में उसे पता नहीं था। फिर एक दिन उसके भाई का एक दोस्त उसे अपनी बाँहों में भर लेता है तो उसे अपने शरीर में चिंटिया सी रेंगती हुई महसूस होती हैं, जिनसे वह चाहकर भी नजात हासिल नहीं कर पाती।
दम
दंगों में घिरे एक परिवार की कहानी। वे तीन भाई थे। तीनों में से दो घर पर थे और एक बाहर गया हुआ था। तीसरा जब बाहर से लौटकर घर आया तो उसने अपनी रोती हुई माँ को बताया कि वह तीन को ठिकाने लगाकर आया है। माँ उससे हर बात को विस्तार से पूछती है। बाहर गलियों में पुलिस गश्त कर रही होती है और दोनों पक्ष नारा लगा रहे होते हैं। बाद में पता चलता है कि नारे तो मोहल्ले का पागल आदमी लगा रहा है। नारा सुनकर पुलिस उस घर में घुस आती है, लेकिन पुलिस उस पागल को पकड़ने के बजाय घर वालों को पकड़ ले जाती है।
म्यूज़िकल चेयर
यह कुछ दोस्तों की कहानी है जो मामूल के मुताबिक़ मिलते हैं। जिस दोस्त के यहाँ वे लोग मिलते हैं वहाँ चार कुर्सियां रखी हुई हैं। वे चारों कुर्सियां उस दीवार के नीचे रखी हैं जिस पर वक़्त बताने की घड़ी टंगी है। उस घड़ी की दो रेशमी डोरियां हैं और उनमें से एक डोरी एक दोस्त पकड़ लेता है, कि वह डोरी खींचकर वक़्त को रोक देना चाहता है। उसके बाक़ी सारे दोस्त उसे डोरी खींचने से रोकने के लिए मना करते हैं और तरह-तरह की दलीलें देते हैं।
देर से रुकी हुई गाड़ी
यह एक ट्रेन और उसमें सवार लोगों की कहानी है, ट्रेन चलते-चलते अचानक रुक जाती है। ट्रेन को रुके हुए जब काफ़ी देर हो जाती है तो लोग परेशान हो जाते हैं और ट्रेन के रुकने का कारण जानने के लिए बेचैन हो जाते हैं। साथ ही वे लोग ट्रेन के यूँ रुक जाने से सिस्टम, मुल्क और दूसरी परेशानियों के बारे में बहस करने लगते हैं।
गूमड़
एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जिसे संदेह हो जाता है कि उसके सिर में गूमड़ निकल आया है। वह उसे छुपाने के लिए टोपी पहनना शुरू कर देता है। टोपी को लेकर उसके दोस्त उसका मज़ाक़ भी उड़ाते हैं, पर वह किसी की परवाह नहीं करता। गूमड़ के कारण जब वह बहुत ज़्यादा परेशान हो जाता है तो एक मनोचिकित्सक के पास जाता है और उससे इलाज कराता है। इलाज के बाद जब वह अपने एक दोस्त से मिलता है तो उसका दोस्त कहता है कि तुम्हारे सिर में गूमड़-सा निकल आया है।
सद्द-ए-बाब
विदेश में बसे एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जो अपने गाँव में देखे गए भूत को लेकर परेशान हो जाता है। वह इसका ज़िक्र अपनी बीवी से भी करता है, मगर कोई नतीजा नहीं निकलता। उस भूत से अपने बच्चों को बचाने के लिए वह उन्हें फ़ोन करता है और फिर एका-एक ग़ायब हो जाता है। उसकी तलाश में उसकी बीवी हर मुम्किन कोशिश करती है, पर कोई कामयाबी नहीं मिलती है। फिर एक दिन वह ख़ुद ही वापस आ जाता है, मगर उसके ग़ायब होने का कोई कारण नहीं पता चलता।
सवाब-ए-जारिया
कहानी एक मुस्लिम मोहल्ले और उसमें बनी मस्जिद की है, जिसके प्रबंधन कमेटी में शामिल कुछ लोगों के चरित्र से आम लोगों को शिकायत है। उन लोगों को प्रबंधन कमेटी से हटाने के लिए वह लोग जिहाद का ऐलान करते हैं। जिस दिन उन लोगों को जिहाद करना होता है, उसी दिन पता चलता है कि उस प्रबंधन कमेटी के लोगों ने तो अपनी एक अलग मस्जिद बना ली है।
निशान वाले
यह एक ऐसे दंपत्ति की कहानी है, जो निशान वालों से बचने के लिए सारी दुनिया में मारे-मारे फिरते हैं। फिर वह एक नए मकान में आकर रहने लगते हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि वे निशान वालों के पड़ोस में ही आकर बस गए हैं। पत्नी के कहने पर वह पड़ोसियों से मेल-जोल भी करता है। मिलने पर वे उसे अच्छे लगते हैं। एक रोज़ वह पड़ोसी छुपाने के लिए उन्हें कोई चीज़ देकर जाता है कि जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था।
शर्त
कहानी हमारे समाज के उभरते मध्यम वर्ग के युवाओं की इच्छाओं को बयान करती है। उसने बी.ए. पास कर लिया था लेकिन वह बे-रोज़गार था। वह एक शानदार सूट पहनकर बाज़ार निकल जाता है और किताबों, कपड़ों और दूसरी दुकानों पर जाता है, ख़रीदता कुछ भी नहीं। भूख लगने पर वह एक सेठ की बेटी की हो रही शादी के आयोजन में चला जाता है। वहाँ के लोगों की नज़रों को भांपकर बिना कुछ खाए ही वापस निकल आता है। वहाँ से आकर वह सोचता है कि ज़िंदगी जीना इतना मुश्किल भी नहीं है... बशर्ते कि!
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ86
बाल-साहित्य1989
-
