Haneef Kaifi's Photo'

हनीफ़ कैफ़ी

1934

ग़ज़ल 8

शेर 9

मुद्दतें गुज़रीं मुलाक़ात हुई थी तुम से

फिर कोई और आया नज़र आईने में

अपने काँधों पे लिए फिरता हूँ अपनी ही सलीब

ख़ुद मिरी मौत का मातम है मिरे जीने में

अना अना के मुक़ाबिल है राह कैसे खुले

तअल्लुक़ात में हाइल है बात की दीवार

पुस्तकें 9

चराग़-ए-नीम शब

 

1986

Hindustani Adab Ke Memar: Jai Shankar Prasad

 

1984

Intikhab-e-Kalam Shameem Karhani

 

1999

इंतिख़ाब-ए-कलाम शमीम करहानी

 

1999

सहर से पहले

 

2004

Tanqeed-o-Taujeeh

 

1997

Urdu Ki Nai Kitab

 

1986

Urdu Mein Nazm-e-Muarra Aur Azad Nazm

Ibtida Se 1947 Tak

1982

Urdu Shairi Mein Sanit

 

1975