- पुस्तक सूची 181263
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ85
बाल-साहित्य1984
नाटक / ड्रामा923 एजुकेशन / शिक्षण343 लेख एवं परिचय1383 कि़स्सा / दास्तान1593 स्वास्थ्य105 इतिहास3276हास्य-व्यंग607 पत्रकारिता201 भाषा एवं साहित्य1705 पत्र742
जीवन शैली30 औषधि981 आंदोलन272 नॉवेल / उपन्यास4295 राजनीतिक354 धर्म-शास्त्र4753 शोध एवं समीक्षा6596अफ़साना2679 स्केच / ख़ाका242 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2038पाठ्य पुस्तक450 अनुवाद4247महिलाओं की रचनाएँ5827-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1280
- दोहा48
- महा-काव्य101
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1262
- हाइकु11
- हम्द54
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1600
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात582
- माहिया20
- काव्य संग्रह4866
- मर्सिया387
- मसनवी746
- मुसद्दस43
- नात582
- नज़्म1203
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा182
- क़व्वाली17
- क़ित'अ67
- रुबाई272
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
माहिर-उल क़ादरी
लेख 4
अशआर 9
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
इक बार तुझे अक़्ल ने चाहा था भुलाना
सौ बार जुनूँ ने तिरी तस्वीर दिखा दी
EXPLANATION #1
इस शे’र में इश्क़ की घटना को अक़्ल और जुनूँ के पैमानों में तौलने का पहलू बहुत दिलचस्प है। इश्क़ के मामले में अक़्ल और उन्माद का द्वंद शाश्वत है। जहाँ अक़्ल इश्क़ को मानव जीवन के लिए हानि का एक कारण मानती है वहीं उन्माद इश्क़ को मानव जीवन का सार मानती है।और अगर इश्क़ में उन्माद पर अक़्ल हावी हो गया तो इश्क़ इश्क़ नहीं रहता क्योंकि इश्क़ की पहली शर्त जुनून है। और जुनून का ठिकाना दिल है। इसलिए अगर आशिक़ दिल के बजाय अक़्ल की सुने तो वो अपने उद्देश्य में कभी कामयाब नहीं होगा।
शायर कहना चाहता है कि मैं अपने महबूब के इश्क़ में इस क़दर मजनूं हो गया हूँ कि उसे भुलाने के लिए अक़्ल ने एक बार ठान ली थी मगर मेरे इश्क़ के जुनून ने मुझे सौ बार अपने महबूब की तस्वीर दिखा दी। “तस्वीर दिखा” भी ख़ूब है। क्योंकि उन्माद की स्थिति में इंसान एक ऐसी स्थिति से दो-चार होजाता है जब उसकी आँखों के सामने कुछ ऐसी चीज़ें दिखाई देती हैं जो यद्यपि वहाँ मौजूद नहीं होती हैं मगर इस तरह के जुनून में मुब्तला इंसान उन्हें हक़ीक़त समझता है। शे’र अपनी स्थिति की दृष्टि से बहुत दिलचस्प है।
शफ़क़ सुपुरी
ग़ज़ल 18
नज़्म 2
नअत 4
क़ितआ 4
पुस्तकें 229
चित्र शायरी 3
वीडियो 12
ऑडियो 9
अगर फ़ितरत का हर अंदाज़ बेबाकाना हो जाए
अभी दश्त-ए-कर्बला में है बुलंद ये तराना
ऐ निगाह-ए-दोस्त ये क्या हो गया क्या कर दिया
अन्य लेखकों को पढ़िए
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ85
बाल-साहित्य1984
-
