शीन काफ़ निज़ाम का परिचय
उपनाम : 'शीन काफ निज़ाम'
मूल नाम : शिव कुमार निज़ाम
संबंधी : आदिल रज़ा मंसूरी (शिष्य), बृजेश अम्बर (बेटा)
LCCN :n89283126
पुरस्कार : साहित्य अकादमी अवार्ड(2010)
आँखें कहीं दिमाग़ कहीं दस्त ओ पा कहीं
रस्तों की भीड़-भाड़ में दुनिया बिखर गई
शिव कुमार, जो अपने क़लमी नाम शीन काफ़ निज़ाम से मारूफ़ हैं, उर्दू के एक मुमताज़ शाइर और अदबी मुहक़्क़िक़ हैं। निज़ाम ने कई शेरी मजमूए शाए किए हैं, जिनमें “लम्हों की सलीब”, “दश्त में दरिया”, “नाद”, “साया कोई लंबा न था”, “बयाज़ें खो गई हैं”, “गुमशुदा दैर की गूँजती घंटियाँ” और “रास्ता ये कहीं नहीं जाता” शामिल हैं। निज़ाम के शेरी मजमूए “गुमशुदा दैर की गूँजती घंटियाँ” को 2010 में साहित्य अकादमी एवार्ड बराए उर्दू से नवाज़ा गया।
प्राधिकरण नियंत्रण :लाइब्रेरी ऑफ कॉंग्रेस नियंत्रण संख्या : n89283126