हुस्न ग़म्ज़े की कशाकश से छुटा मेरे बा'द

मिर्ज़ा ग़ालिब

हुस्न ग़म्ज़े की कशाकश से छुटा मेरे बा'द

मिर्ज़ा ग़ालिब

MORE BYमिर्ज़ा ग़ालिब

    हुस्न ग़म्ज़े की कशाकश से छुटा मेरे बा'द

    बारे आराम से हैं अहल-ए-जफ़ा मेरे बा'द

    after me, beauty was spared the strain of coquetry

    in great comfort are these cruel damsels after me

    मंसब-ए-शेफ़्तगी के कोई क़ाबिल रहा

    हुई माज़ूली-ए-अंदाज़-ओ-अदा मेरे बा'द

    of rank, deserving none remains amongst those lovelorn

    grace and airs are all deposed, for now that I am gone

    शम्अ' बुझती है तो उस में से धुआँ उठता है

    शो'ला-ए-इश्क़ सियह-पोश हुआ मेरे बा'द

    from a candle extinguished dark smoke is seen to rise

    the flame of love was dressed in black after my demise

    ख़ूँ है दिल ख़ाक में अहवाल-ए-बुताँ पर या'नी

    उन के नाख़ुन हुए मुहताज-ए-हिना मेरे बा'द

    at the beauties' sorry plight, my heart, in earth, does bleed

    after I have gone, their nails, from henna favours need

    दर-ख़ुर-ए-अर्ज़ नहीं जौहर-ए-बेदाद को जा

    निगह-ए-नाज़ है सुरमे से ख़फ़ा मेरे बा'द

    for her cruelty's address there is no worthy place

    she, on my death, collyrium does from her eyes erase

    है जुनूँ अहल-ए-जुनूँ के लिए आग़ोश-ए-विदा'अ

    चाक होता है गरेबाँ से जुदा मेरे बा'द

    lunacy now bids adieu to love-crazed all around,

    after me the tear's no more, then in the collar found

    कौन होता है हरीफ़-ए-मय-ए-मर्द-अफ़गन-ए-इश्क़

    है मुकर्रर लब-ए-साक़ी पे सला मेरे बा'द

    "the stupefying wine of love, does anyone desire?"

    after me, repeatedly, she calls out to inquire

    ग़म से मरता हूँ कि इतना नहीं दुनिया में कोई

    कि करे ताज़ियत-ए-मेहर-ओ-वफ़ा मेरे बा'द

    I die of grief as in this world there isn't even one

    who will mourn for faith and friendship when my life in done

    आए है बेकसी-ए-इश्क़ पे रोना 'ग़ालिब'

    किस के घर जाएगा सैलाब-ए-बला मेरे बा'द

    for this helplessness of love, now tears I do shed

    whose home will this flood inundate, after I am dead

    थी निगह मेरी निहाँ-ख़ाना-ए-दिल की नक़्क़ाब

    बे-ख़तर जीते हैं अरबाब-ए-रिया मेरे बा'द

    था मैं गुलदस्ता-ए-अहबाब की बंदिश की गियाह

    मुतफ़र्रिक़ हुए मेरे रुफ़क़ा मेरे बा'द

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    नोमान शौक़

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    हुस्न ग़म्ज़े की कशाकश से छुटा मेरे बा'द नोमान शौक़

    स्रोत :
    • पुस्तक : Deewan-e-Ghalib Jadeed (Al-Maroof Ba Nuskha-e-Hameedia) (पृष्ठ 212)
    • पुस्तक : Ghair Mutdavil Kalam-e-Ghalib (पृष्ठ 54)
    • रचनाकार : Jamal Abdul Wahid
    • प्रकाशन : Ghalib Academy Basti Hazrat Nizamuddin,New Delhi-13 (2016)
    • संस्करण : 2016

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