मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किए हुए

मिर्ज़ा ग़ालिब

मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किए हुए

मिर्ज़ा ग़ालिब

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    INTERESTING FACT

    ग़ज़ल के एक शेर दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन का इस्तेमाल गुलज़ार द्वारा निर्मित फिल्म मौसम में किया गया

    मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किए हुए

    जोश-ए-क़दह से बज़्म चराग़ाँ किए हुए

    Its been long, since my lover, was a guest of mine

    and my house was suffused with the glow of wine

    करता हूँ जम्अ' फिर जिगर-ए-लख़्त-लख़्त को

    अर्सा हुआ है दावत-ए-मिज़्गाँ किए हुए

    I again amass the shards of my heart somehow

    Ages since I've feasted on her eyelashes now

    फिर वज़-ए-एहतियात से रुकने लगा है दम

    बरसों हुए हैं चाक गरेबाँ किए हुए

    The demands of decorum cause me great torment

    Long past since my collar, in my craziness I rent

    फिर गर्म-नाला-हा-ए-शरर-बार है नफ़स

    मुद्दत हुई है सैर-ए-चराग़ाँ किए हुए

    Lament longs that from my breath may sparks of fire flow

    lts been a while since on a journey, of lights I did go

    फिर पुर्सिश-ए-जराहत-ए-दिल को चला है इश्क़

    सामान-ए-सद-हज़ार नमक-दाँ किए हुए

    Love proceeds to console my wounded heart again

    While carrying with it quantities of salt for to rub in

    फिर भर रहा हूँ ख़ामा-ए-मिज़्गाँ ब-ख़ून-ए-दिल

    साज़-ए-चमन तराज़ी-ए-दामाँ किए हुए

    The quill of my eyelashes I, dip in my blood anew

    For to decorate my vest in the flower's form and hue

    बाहम-दिगर हुए हैं दिल दीदा फिर रक़ीब

    नज़्ज़ारा ख़याल का सामाँ किए हुए

    My heart and my eyes are now adversaries again

    One seeks to think of her, the other for her sight to gain

    दिल फिर तवाफ़-ए-कू-ए-मलामत को जाए है

    पिंदार का सनम-कदा वीराँ किए हुए

    My heart repeatedly repairs to those avenues

    Where I will lose all self respect, be subject to abuse

    फिर शौक़ कर रहा है ख़रीदार की तलब

    अर्ज़-ए-मता-ए-अक़्ल-ओ-दिल-ओ-जाँ किए हुए

    Love once again is eager for a customer to find

    Offering up all the wealth of heart, life and mind

    दौड़े है फिर हर एक गुल-ओ-लाला पर ख़याल

    सद-गुलिस्ताँ निगाह का सामाँ किए हुए

    My thoughts do flit at every beauty, tulip be or rose

    A hundred gardens in my eyes, find easy repose

    फिर चाहता हूँ नामा-ए-दिलदार खोलना

    जाँ नज़्र-ए-दिल-फ़रेबी-ए-उनवाँ किए हुए

    Again I'd like to unseal the missive from my lover

    My life's forfeit, at the alluring, title on the cover

    माँगे है फिर किसी को लब-ए-बाम पर हवस

    ज़ुल्फ़-ए-सियाह रुख़ पे परेशाँ किए हुए

    Desire seeks "that someone" to, out on the terrace be

    Her tresses dark, strewn across her face seductively

    चाहे है फिर किसी को मुक़ाबिल में आरज़ू

    सुरमे से तेज़ दश्ना-ए-मिज़्गाँ किए हुए

    Wishes want "that someone" to, be face to face with me

    The daggers of her lashes honed, by kohl's ebony

    इक नौ-बहार-ए-नाज़ को ताके है फिर निगाह

    चेहरा फ़रोग़-ए-मय से गुलिस्ताँ किए हुए

    For a youthful beauty 'gain thirst these eyes of mine

    Her face being all ablossom then with the glow of wine

    फिर जी में है कि दर पे किसी के पड़े रहें

    सर ज़ेर-बार-ए-मिन्नत-ए-दरबाँ किए हुए

    I feel like standing once again at somebody's gate

    Pleading with her sentinel with my head oblate

    जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन

    बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए

    Again this heart seeks those days of leisure as of yore

    Sitting just enmeshed in thoughts of my paramour

    'ग़ालिब' हमें छेड़ कि फिर जोश-ए-अश्क से

    बैठे हैं हम तहय्या-ए-तूफ़ाँ किए हुए

    Trouble, tease me not for I, with the ardour of my tears

    Await determined to unleash a storm beyond all fears

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