नींद की गोली न खाओ नींद लाने के लिए

शिवकुमार बिलग्रामी

नींद की गोली न खाओ नींद लाने के लिए

शिवकुमार बिलग्रामी

MORE BY शिवकुमार बिलग्रामी

    नींद की गोली खाओ नींद लाने के लिए

    कौन आएगा भला तुम को जगाने के लिए

    बेटा बेटी फ़ोन पर अक्सर बताते हैं मुझे

    वक़्त मिलता ही नहीं है गाँव आने के लिए

    क़ब्र अपनी खोद कर ख़ुद लेट जाओ एक दिन

    वक़्त किस के पास है मिट्टी उठाने के लिए

    वो भी अपने वो भी अपने वो भी अपने थे कभी

    वो जो अपने थे कभी वो थे रुलाने के लिए

    अब जो अपने हैं उन का हाल हम से पूछिए

    हाल भी वो पूछते हैं तो सताने के लिए

    किस लिए धड़कन बढ़ी है फिर तिरी मजरूह दिल

    क्या अभी कोई बचा है आज़माने के लिए

    स्रोत:

    • Book: Nai Kahkashan (Pg. 120)
    • Author: Shivkumar Bilagrami
    • प्रकाशन: Amrit Prakashan (2015)
    • संस्करण: 2015

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY

    Added to your favorites

    Removed from your favorites