उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

मीर तक़ी मीर

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

मीर तक़ी मीर

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    उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ दवा ने काम किया

    देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया

    Stratagems all came apart, no cure could render remedy

    it was this ailment of my heart, that finished me off finally

    अहद-ए-जवानी रो रो काटा पीरी में लीं आँखें मूँद

    या'नी रात बहुत थे जागे सुब्ह हुई आराम किया

    Copious tears, in youth I shed, in dotage shut eyes tiredly

    night I stayed away from bed, come morning now lie peacefully

    हर्फ़ नहीं जाँ-बख़्शी में उस की ख़ूबी अपनी क़िस्मत की

    हम से जो पहले कह भेजा सो मरने का पैग़ाम किया

    'tis my fate that's inclement, no fault is of her clemency

    message that she earlier sent, happened to be a death decree

    नाहक़ हम मजबूरों पर ये तोहमत है मुख़्तारी की

    चाहते हैं सो आप करें हैं हम को अबस बदनाम किया

    Us weak, she wrongfully accuses, of taking untold liberty

    while she acts as she chooses, and maligns us needlessly

    सारे रिंद औबाश जहाँ के तुझ से सुजूद में रहते हैं

    बाँके टेढ़े तिरछे तीखे सब का तुझ को इमाम किया

    all drunks and vagabonds that be, of the world submit to thee

    crooked, crafty, bent, shifty, their leader all they deem you be

    सरज़द हम से बे-अदबी तो वहशत में भी कम ही हुई

    कोसों उस की ओर गए पर सज्दा हर हर गाम किया

    even in a maddened state, irreverent I could not be

    Miles I went towards her gate, kowtowing incessantly

    किस का काबा कैसा क़िबला कौन हरम है क्या एहराम

    कूचे के उस के बाशिंदों ने सब को यहीं से सलाम किया

    what is mecca's mosque and say who is concerned with piety

    in her street who choose to stay, bow from here itself you see

    शैख़ जो है मस्जिद में नंगा रात को था मय-ख़ाने में

    जुब्बा ख़िर्क़ा कुर्ता टोपी मस्ती में इनआ'म किया

    the priest nude in the mosque today, last night in the tavern he

    gave all his pious clothes away, whilst on a drunken spree

    काश अब बुर्क़ा मुँह से उठा दे वर्ना फिर क्या हासिल है

    आँख मुँदे पर उन ने गो दीदार को अपने आम किया

    if her face she would unveil,whilst alive I chanced to be

    if later then to what avail, if her face then all could see

    याँ के सपीद सियह में हम को दख़्ल जो है सो इतना है

    रात को रो रो सुब्ह किया या दिन को जूँ तूँ शाम किया

    in this play of black and white,'tis all I am allowed to be

    Bring in the dawn, crying all night, spend dawn to dusk in agony

    सुब्ह चमन में उस को कहीं तकलीफ़-ए-हवा ले आई थी

    रुख़ से गुल को मोल लिया क़ामत से सर्व ग़ुलाम किया

    perchance the morning breeze had paved her journey to the bower

    the cypress by her form enslaved, and by her face the flower

    साअद-ए-सीमीं दोनों उस के हाथ में ला कर छोड़ दिए

    भूले उस के क़ौल-ओ-क़सम पर हाए ख़याल-ए-ख़ाम किया

    both her silver wrists I held in my hands then set them free

    how her promises dispelled my senses, made a fool of me

    काम हुए हैं सारे ज़ाएअ' हर साअ'त की समाजत से

    इस्तिग़्ना की चौगुनी उन ने जूँ जूँ मैं इबराम किया

    all my efforts were annuled by my beseeching constantly

    her indifference just quadrupled, the more I sought insistently

    ऐसे आहु-ए-रम-ख़ुर्दा की वहशत खोनी मुश्किल थी

    सेहर किया ए'जाज़ किया जिन लोगों ने तुझ को राम किया

    for such a swift alert gazelle, 'tis hard to shed timidity

    if someone could rein in, compel, a miracle 'twould surely be

    'मीर' के दीन-ओ-मज़हब को अब पूछते क्या हो उन ने तो

    क़श्क़ा खींचा दैर में बैठा कब का तर्क इस्लाम किया

    Why is it you seek to know, of Miir's religion, sect, for he

    Sits in temples, painted brow, well on the road to heresy

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    उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

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