मुनव्वर राना के उद्धरण





मैं ने ग़ुर्बत के दिनों में भी बीवी को हमेशा ऐसे रखा है जैसे मुक़द्दस किताबों में मोर के पर रखे जाते हैं।
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उर्दू मुशायरों की हवेली देखते देखते ही कैसी वीरान होती जा रही है। हवेली की मुंडेरों पर रखे हुए चराग़ एक-एक करके बुझते जा रहे हैं। ऐवान-ए-अदब की तरफ़ ले जाती हुई सबसे ख़ूबसूरत, पुर-विक़ार और पुर-कशिश पगडंडी कितनी सुनसान हो चुकी है। ख़ुदा करे किसी भी ज़बान पर ये बुरा वक़्त न आए, कोई कुंबा ऐसे न बिखरे, किसी ख़ानदान का इतनी तेज़ी से सफ़ाया न हो, किसी क़बीले की ये दुर्दशा न हो। अभी कल की बात है कि मुशायरे का स्टेज किसी भरे-पुरे दिहात की चौपाल जैसा था, स्टेज पर रौनक़-अफ़रोज़ मोहतरम शो'अरा किसी देव-मालाई किरदार मा'लूम होते थे। इन ज़िंदा किरदारों की मौजूदगी में तहज़ीब इस तरह फलती-फूलती थी जैसे बरसात के दिनों में इश्क़-ए-पेचाँ ऊँची-ऊँची दीवारों का सफ़र तय करता है।
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उर्दू मुशायरों की हवेली देखते देखते ही कैसी वीरान होती जा रही है। हवेली की मुंडेरों पर रखे हुए चराग़ एक-एक करके बुझते जा रहे हैं। ऐवान-ए-अदब की तरफ़ ले जाती हुई सबसे ख़ूबसूरत, पुर-विक़ार और पुर-कशिश पगडंडी कितनी सुनसान हो चुकी है। ख़ुदा करे किसी भी ज़बान पर ये बुरा वक़्त न आए, कोई कुंबा ऐसे न बिखरे, किसी ख़ानदान का इतनी तेज़ी से सफ़ाया न हो, किसी क़बीले की ये दुर्दशा न हो। अभी कल की बात है कि मुशायरे का स्टेज किसी भरे-पुरे दिहात की चौपाल जैसा था, स्टेज पर रौनक़-अफ़रोज़ मोहतरम शो'अरा किसी देव-मालाई किरदार मा'लूम होते थे। इन ज़िंदा किरदारों की मौजूदगी में तहज़ीब इस तरह फलती-फूलती थी जैसे बरसात के दिनों में इश्क़-ए-पेचाँ ऊँची-ऊँची दीवारों का सफ़र तय करता है।
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शादी के घर में सुकून ढूँढना रेलवे स्टेशन पर अस्ली मिनरल वाटर ढूँढने की तरह होता है।
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हम सब सर्कस के उस जोकर का रोल अदा कर रहे हैं जो हँसाने के लिए रोता है और रुलाने के लिए खिल्खिला कर हँस देता है।
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शादी वाले घर में हर शख़्स मस्रूफ़ दिखाई देता है, जिसके पास कुछ काम नहीं होता वो ज़ियादा ही मसरूफ़ दिखाई देता है।
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उर्दू हिन्दुस्तानी नस्ल की वो लड़की है जो अपने सलोने हुस्न और मिठास भरे लहजे की ब-दौलत सारी दुनिया में महबूब-ओ-मक़बूल है।
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उर्दू हिन्दुस्तानी नस्ल की वो लड़की है जो अपने सलोने हुस्न और मिठास भरे लहजे की ब-दौलत सारी दुनिया में महबूब-ओ-मक़बूल है।
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सच पूछें तो शाइ'री वो नहीं होती जिसे आप मिस्रों में क़ैद कर लेते हैं। बल्कि अस्ल शाइ'री तो वो होती है जिसकी ख़ुश्बू आपके किरदार से आती है।
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सच पूछें तो शाइ'री वो नहीं होती जिसे आप मिस्रों में क़ैद कर लेते हैं। बल्कि अस्ल शाइ'री तो वो होती है जिसकी ख़ुश्बू आपके किरदार से आती है।
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डॉक्टर और क़साई दोनों काट-पीट करते हैं लेकिन एक ज़िंदगी बचाने के लिए ये सब करता है जब्कि दूसरा ज़िंदगी को ख़त्म करने के लिए।
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पस्ती की तरफ़ जाती हुई किसी भी क़ौम का पहला क़दम अपनी ज़बान को रौंदने के लिए उठता है।
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गाँव में किसी को पानी पिलाने से पहले मिठाई नहीं तो कम-अज़-कम गुड़ ज़रूर पेश किया जाता है। जब कि शहरों में पानी पच्चीस पैसे फ़ी-गिलास मिलता है। ये फ़र्क़ होता है कुँए के मीठे पानी और शहर के पाइपों के पानी में।
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मशक़्क़त की रोटी में सबसे ज़ियादा नशा होता है क्योंकि मशक़्क़त की रोटी के ख़मीर से ख़ुदा की ख़ुश्बू आती है।
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आज भी गाँव में एक आदमी की मौत को गाँव की मौत समझा जाता है। मर्हूम के साथ क़ब्रिस्तान तक सारा गाँव जाता है। लेकिन शहर में शरीक-ए-ग़म होना दूर की बात है। काँधा भी उसी जनाज़े को देते हैं जिसके लवाहिक़ीन से दामे-दिरमे कोई फ़ाएदा पहुँचने वाला हो।
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ज़िंदगी आँखों में ख़्वाबों की सुनह्री फ़स्ल उगाए ता'बीरों की बारिश की मुंतज़िर रहती है और एक न एक दिन थक जाती है।
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एक तल्ख़ हक़ीक़त ये भी है कि ज़बान वही मुस्तनद और मक़बूल होती है जो हाकिम की होती है। महकूम की कोई ज़बान नहीं होती।
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दुनिया अगर सिर्फ़ डॉक्टरों के कहने पर चलना शुरू कर दे तो सारी दुनिया के कारोबार ठप पड़ जाएँ।
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अस्पताल की लिफ़्ट भी इतनी सुस्त-रफ़्तार होती है कि बजाए बिजली के ऑक्सीजन से चलती हुई महसूस होती है।
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शाइ'री करना कुँए में नेकियाँ फेंकने जैसा अ'मल है। शाइ'री तो वो इम्तिहान है जिसका नतीजा आते-आते कई नस्लें मर-खप चुकी होती हैं।
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शाइ'री करना कुँए में नेकियाँ फेंकने जैसा अ'मल है। शाइ'री तो वो इम्तिहान है जिसका नतीजा आते-आते कई नस्लें मर-खप चुकी होती हैं।
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साईंस अपने वजूद की आहट को सूर-ए-इस्राफ़ील साबित करने के लिए चाँद पर चर्ख़ा कातती हुई बुढ़िया के पास पहुँच गई लेकिन ज़िंदगी रोज़ शिकरे के पंजे में दबी गौरय्या की तरह फड़फड़ा कर आँखें बंद कर लेती है।
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साईंस अपने वजूद की आहट को सूर-ए-इस्राफ़ील साबित करने के लिए चाँद पर चर्ख़ा कातती हुई बुढ़िया के पास पहुँच गई लेकिन ज़िंदगी रोज़ शिकरे के पंजे में दबी गौरय्या की तरह फड़फड़ा कर आँखें बंद कर लेती है।
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