नई नज़्में

नज़्मों का विशाल संग्रह - उर्दू शायरी का एक स्वरुप


नज़्म, उर्दू में एक विधा के रूप में, उन्नीसवीं सदी के आख़िरी दशकों के दौरान पैदा हुई और धीरे धीरे पूरी तरह स्थापित हो गई। नज़्म बहर और क़ाफ़िए में भी होती है और इसके बिना भी। अब नसरी नज़्म (गद्द-कविता) भी उर्दू में स्थापित हो गई है।


नज़्म
16 दिसम्बर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला
अक्स-बर-अक्स
अदाकार चेहरे
अद्ल का फ़ुक़्दान
अन-छूई कथा
अफ़्कार-ए-परेशाँ
अश्क मेरे अपने
आगही
आधी मोहब्बत
इय्याक-नाबोदो व इय्याक-नस्तईन
उलझन
एक और शराबी शाम
ऐसा क्यूँ होता है
कारवान-ए-हयात
काश
क़ुर्रतुल-ऐन-हैदर
क्या वहीं मिलोगे तुम
ख़याल
ख़ुद-कलामी ख़ातून-ए-ख़ाना की
ग़ुंडा
गुड़िया
गुनाह
गुलज़ार
ग्लैडिएटर
चाँद के तमन्नाई
चाँद जैसा इश्क़
चिंगारियों का रक़्स
ज़िंदगी
जुज़्व
ज़ुल्मात
जो मैं ने सोचा था
जो रही सो बे-ख़बरी रही
तख़्लीक़
तबस्सुम
तबीअत के रंग
तराना-ए-रेख़्ता
तलाश
तिरे बग़ैर
तिलिस्म-ए-सफ़र
तुम अगर चाहो तो
तुम्हारी आँखें
तेरी संग
दवाम
दस्तरस
दिल से
दिल्ली दर्शन
दिसम्बर आ गया है
नज़्म
नया आदम
नॉस्टेलजिया
पल-दो-पल
पूरा चाँद
पेच-ओ-ताब
फ़रियाद
बस अना को बहाल रखना है
बुढ़ापे की चोटी
बे-क़रारी
बे-ख़याली में तख़्लीक़
बॉर्डर-लाइन
भूक में दबे बचपन
मकीन ही अजीब हैं
मादूम होती ख़ुश्बू
मिडिल-क्लास
मेड फॉर ईच-अदर
मेरा उस का साथ
मेरा शहर
मेरी शाइरी
मैं और तुम
मैसेज
मोहब्बत
यौम-ए-मज़दूर
राज़ी-नामा
रात फिर दर्द बनी
रौशनी कम है
ला-यख़ुल
ले-बाई एरिया
वहशत
विपंस ऑफ़ मास डेस्ट्रक्शन
वो नहीं आए
वो बोलती कुछ भी नहीं
शरीफ़-ज़ादा
शिकस्त-ए-आरज़ू
शिकस्त-ए-जाम
शुऊर-ए-दिल से
संग-दिल
समय
समुंदर का रास्ता
सराबों का सफ़र
सर्कस
सस्ती नज़्म
सिराज औरंग-आबादी
सुनो
हम कहाँ आ गए
हलचल
seek-warrow-w
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