उर्दू शायरी में शराब और सूफ़ियाना रंग: ख़मरियात (शराब की शायरी) का शुरुआती दौर
उर्दू ग़ज़ल के शुरुआती दौर में शराब, साक़ी और मय-ख़ाने का ज़िक्र दरअस्ल सूफ़ीवाद और इश्क़-ए-हक़ीक़ी (ईश्वरीय प्रेम) का प्रतीक था, जिसे वली दकनी और ख़्वाजा मीर दर्द जैसे शायरों ने कमाल तक पहुँचाया।