मंटो का फ़न: सादगी, सहजता और वैचारिक बेड़ियों से आज़ादी
मंटो की असली ख़ूबी उनके सादगी भरे और सहज अंदाज़ में है। उन्होंने अक़्लियत-पसंदी (तर्कवादिता) और किसी ख़ास विचारधारा से जुड़ाव को इसलिए ठुकरा दिया, ताकि उनका रचनात्मक आत्मसम्मान और तख़य्युल (कल्पनाशक्ति) ज़िंदा रह सके।