aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "lailaa"
है वही आरिज़-ए-लैला वही शीरीं का दहननिगह-ए-शौक़ घड़ी भर को जहाँ ठहरी है
हुआ रश्क-ए-लैला की फ़ुर्क़त में मजनूँमिरा हाल और क़ैस का है मुताबिक़
मैं मजनूँ देखते ही मर गया इस रश्क-ए-लैला कोकफ़न के वास्ते गोया फटा था पर्दा महमिल का
तलाश उस रश्क-ए-लैला की जो रहती है हमें हर-दमउसी से क़ैस के मानिंद वो वीरानों में रहते हैं
तलाश इक रश्क-ए-लैला की है ऐसी दश्त-ए-वहशत मेंकि मुझ को हर बगूले पर गुमाँ होता है महमिल का
तिरे ऐ रश्क-ए-लैला क्यों न हों जिन्न-ओ-बशर आशिक़बना है पर्दा-ए-चश्म-ए-परी से पर्दा महमिल का
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