aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "haajara"
हाजरा मसरूर
1930 - 2012
लेखक
हाजरा नूर ज़रयाब
born.1978
शायर
हाजरा नाज़ली
1921 - 2004
अल्लामा अहमद बिन हजर आल-ए-बूतामी
अब्द-उर-रशीद हान्जोरा
हाजरा शकूर
अबुल हसनात नदवी
died.1924
हाजरा वली-उल-हक़
संपादक
बज़्म-ए-अहल-ए-क़लम हज़ारा
पर्काशक
हाजरा बेगम
हाजरा बानो
बाबू माता प्रसाद हजीला
अनुवादक
हाजिरा परवीन
Ibn-e-Hajar Haitami
हस्साना अनीस
अगर हो तुम 'हाजरा' तो फिर मुझ से मिल के 'मसरूर' क्यूँ नहीं होतुम्हारे आगे 'ओपेंदर-नाथ-अश्क' बन के आँसू बहा रहा हूँ
मैं ने तौरात ओ इंजील ओ क़ुरआन मेंयर्मिया हाजरा और याक़ूब
हाजरा सी अगर है तिरी जुस्तुजू मेहरबाँ तुझ पे सहरा भी हो जाएगाप्यास तेरी बुझाने को ऐ तिश्ना-लब मीठे पानी के धारे पलट आएँगे
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
बीसवीं सदी का आरम्भिक दौर पूरे विश्व के लिए घटनाओं से परिपूर्ण समय था और विशेष तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप के लिए यह एक बड़े बदलाव का युग था। नए युग की शुरुआत ने नई विचारधाराओं के लिए ज़मीन तैयार की और पश्चिम की विस्तारवादी आकांछाओं को गहरा आघात पहुँचाया। इन परिस्थितियों ने उर्दू शायरी की विषयवस्तु और मुहावरे भी पूरी तरह बदल दिए और इस बदलाव की अगुआई का श्रेय निस्संदेह अल्लामा इक़बाल को जाता है। उन्होंने पाठकों में अपने तेवर, प्रतीकों, बिम्बों, उपमाओं, पात्रों और इस्लामी इतिहास की विभूतियों के माध्यम से नए और प्रगतिशील विचारों की ऎसी ज्योति जगाई जिसने सब को आश्चर्यचकित कर दिया। उनकी शायरी की विश्व स्तर पर सराहना हुई साथ ही उन्हें विवादों में भी घसीटा गया। उन्हें पाठकों ने एक महान शायर के तौर पर पूरा - पूरा सम्मान दिया और उनकी शायरी पर भी बहुत कुछ लिखा गया है। उन्होंने बच्चों के लिए भी लिखा है और यहां भी उन्हें किसी से कमतर नहीं कहा जा सकता। 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' और 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसी उनकी ग़ज़लों - नज़्मों की पंक्तियाँ आज भी अपनी चमक बरक़रार रखे हुए हैं। यहां हम इक़बाल के २० चुनिंदा अशआर आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। अगर आप हमारे चयन को समृद्ध करने में हमारी मदद करना चाहें तो आपका रेख्ता पर स्वागत है।
महान उर्दू शायर एवं पाकिस्तान के राष्ट्र-कवि जिन्होंने 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' के अतिरिक्त 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' जैसे गीत की रचना की
हमाराہمارا
हम सब का, तमाम का
हज़ाराحَضارَہ
رک : حضارت
हज़ाराہَزارَہ
एक प्रकार का लाला जिसका फूल बहुत बड़ा होता है, बड़े गेंदे की विशेष प्रकार का फूल जिसमें बहुत सी छोटी छोटी पत्तियाँ होती हैं, गेंदे का फूल, दोहरा गेंदा, दोहरा लाला, गुल-ए-सद बर्ग
हज़ाराہَزارا
सब अफ़्साने मेरे
अफ़साना
हिन्दोस्तां हमारा
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
Hamare Rasool
मोहम्मद अब्दुल हई फ़ारूक़ी
कहानी
Hamari Kitab
अफ़ज़ल हुसैन
पाठ्य पुस्तक
Urdu Inshaiya Aur Beeswin Sadi Ke Aham Inshaiya Nigar
लेख
Hamare Afsana Nigar
वक़ार अज़ीम
अफ़साना तन्क़ीद
Hamari Paheliya
सय्यद यूसुफ़ बुख़ारी
पहेली
हमारी आज़ादी
अबुल कलाम आज़ाद
इतिहास
हिन्दुस्ताँ हमारा
Hamare Ismaili Mazhab Ki Haqeeqat Aur Uska Nizam
डॉ. ज़ाहिद अली
हमारी क़ौमी सक़ाफ़त
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
व्याख्यान
Hamari Lok Kahaniyan
प्रेम पाल अश्क
लोक कथाएँ
Hindustan Hamara
Hamari Nafsiyat
मनोविज्ञान
हमारी ही तमन्ना क्यूँ करो तुमतुम्हारी ही तमन्ना क्यूँ करें हम
शजर हजर नहीं कि हमहमेशा पा-ब-गिल रहें
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगामगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भीकुछ हमारी ख़बर नहीं आती
जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँहमारे अश्क तिरी आक़िबत सँवार चले
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
सारी दुनिया के ग़म हमारे हैंऔर सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िलकोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहनहमारे जैब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है
आज क्यूँ सीने हमारे शरर-आबाद नहींहम वही सोख़्ता-सामाँ हैं तुझे याद नहीं
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